कुपोषण पर केंद्र का बड़ा कदम: मिशन पोषण 2.0 से मजबूत होगा आंगनवाड़ी नेटवर्क
ट्रेसेबल पोषण सेवाएं, फोर्टिफाइड चावल, बाजरा और डिजिटल ट्रैकिंग पर सरकार का फोकस
कुपोषण की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान और किशोरियों (14–18 वर्ष) के लिए योजनाओं को मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत एकीकृत किया है। यह एक केंद्र प्रायोजित मिशन है, जिसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर है। मिशन का उद्देश्य 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों एवं आकांक्षी जिलों में रहने वाली किशोरियों तक व्यापक पोषण सेवाएं पहुंचाना है।
सरकार के अनुसार, मिशन पोषण 2.0 मातृ पोषण, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण मानदंडों, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) और मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM) के उपचार पर केंद्रित है। इसके साथ ही व्यवहार परिवर्तन, सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता अभियानों के माध्यम से स्वास्थ्य, तंदुरुस्ती और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत पूरक पोषण मानदंडों को जनवरी 2023 में संशोधित किया गया। संशोधित मानदंड आहार विविधता और संतुलित पोषण पर आधारित हैं, जिनमें गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्वों — जैसे आयरन, जिंक, कैल्शियम, फोलेट और विटामिन — पर विशेष जोर दिया गया है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पोषण सहायता भी प्रदान की जा रही है।
मिशन के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति की जा रही है, ताकि एनीमिया जैसी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, गर्म पके भोजन और घर ले जाने वाले राशन (THR) में सप्ताह में कम से कम एक बार बाजरा के उपयोग पर बल दिया गया है। देशभर में पोषण वाटिकाएं (न्यूट्री-गार्डन) भी विकसित की जा रही हैं, जिससे ताजे फलों, सब्जियों और स्थानीय पौष्टिक उत्पादों तक किफायती पहुंच सुनिश्चित हो सके।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 12 सितंबर 2022 को अधिसूचना जारी कर सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण (2.0) नियम, 2022 लागू किए, जिससे गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के पोषण अधिकारों को विनियमित किया जा सके। साथ ही, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से बाल कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसके तहत SAM और SUW बच्चों की सामुदायिक स्तर पर पहचान, स्क्रीनिंग और उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
सरकार ने ‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन को एक प्रमुख प्रशासनिक उपकरण के रूप में लागू किया है, जिससे आंगनवाड़ी सेवाओं, लाभार्थियों और पोषण संकेतकों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी संभव हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में अल्पवजन, बौनापन और कुपोषण के संकेतकों में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है।
विश्व बैंक और नीति आयोग द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में भी पोषण अभियान और संबंधित कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को सकारात्मक बताया गया है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
