कोरोना संकट के बीच बारिश और बाढ़ से बिहार में बिगड़े हालात, हजारों लोग बेघर, कई लोगों की मौत

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कोरना के कहर के बीच बिहार में कई नदियां उफान पर है। जिससे बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पहले मूसलाधार बारिश के साथ-साथ बाढ़ से बिहार के कई जिलों में भारी तबाही मची है। कोसी और बागमती के उफान से सैकडों गांव जलमग्न हो गए हैं। हर तरफ दहशत का आलम है।

दरअसल नेपाल में बाढ़ से हालात खराब हैं। नेपाल में त्रिशूली, नारायणी, म्याग्दी, गंडकी और कोशी नदी उफान पर है। नेपाल में राजधानी काठमांडू सहित सैकड़ों गांव में बाढ़ से हालात बेकाबू हो चुके हैं। इसी के साथ ही लैंडस्लाइड से रास्ता भी बंद हो चुका है। नेपाल में अब तक कुल 112 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ की वजह से हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।

दरअसल चीन के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण के बाद नेपाल में स्थिति तेजी से बिगड़ी है। पहाड़ी जिलों में बाढ़ और लैंडस्लाइड से 113 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ नेपाल में सभी मुख्य नदियों का बहाव भारत की तरफ किया हुआ है। जिससे गंडक और कोसी हाई अलर्ट पर है। इतना ही नहीं दोनों ही नदियों का पानी बिहार और उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों में बहती है और पानी के बहाव तेज होने की वजह से सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है।

सीतामढ़ी में कहीं नदी तो कहीं बरसाती पानी से तबाही का भयावह आलम देखने को मिल रहा है। लगातार तीन दिनों की बारिश से सीतामढ़ी और शिवहर जिले के लोगों की परेशानी फिर से एक बार बढ़ गई है। सीतामढ़ी और शिवहर जिलों की बात करें तो अधवारा समूह की नदियों का भयावह रूप देखने को मिल रहा है। तो वहीं जिले के शहरी इलाके में भी बरसात के पानी से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

सोनबरसा में झीम नदी के रौद्र रूप में बांध बह गया है तो वहीं सड़कों पर 4 से 5 फ़ीट पानी चढ़ जाने से जिला मुख्यालय से प्रखंड के संपर्क भंग हो गया है। इतना ही नहीं रुन्नीसैदपुर प्रखंड के दर्जनों गांव के घरों में पानी घुस गया है। फिलहाल लखनदेई और मनुष्यमारा के फैलाव से इलाके की स्थिति गंभीर हो चुकी है।

सीतामढ़ी जिले के सुरसंड प्रखंड में भी स्थिति काफी बिगड़ गई है। भिट्ठामोड़ से पूरब कुछ दूरी पर ही एनएच-104 पर नदी का पानी चढ़ गया है। वहीं भिट्ठामोड़ का प्रखंड मुख्यालय का संपर्क भी भंग हो चुका है। रातों रात नदी के पश्चिमी भाग में बांध नहीं रहने के कारण श्रीखण्डी भिट्ठा पश्चिमी, दिवारी मतौना और ड्योढाबारी पंचायत के दर्जनों गांव में बाढ़ से भारी तबाही है। वहीं मरहा नदी में आए उफान से सुतिहारा पुल और लचका में तीन फीट पानी का बहाव हो रहा है। जिले के कई इलाकों में फसलें तबाह हो गई है। परिहार प्रखंड में भी लगातार बारिश से मरहा और हरदी नदी एक बार फिर से उफना गई है। कई गांव पानी से घिर गए हैं। वहीं प्रखंड कार्यालय परिसर में भी पानी प्रवेश कर गया है।

मुजफ्फरपुर में भी बाढ़ और बारिश से हाल बेहाल है। मुज़फ़्फ़रपुर के सदर अस्पताल  के अंदर घुटने भर पानी लगा है। मौसम की पहली बारिश में घुटने भर पानी ने अस्पताल प्रबंधन को घुटने पर ला दिया है। यह अस्पताल कोविड जांच के लिए कलेक्शन सेन्टर का प्रमुख जगह है। साथ ही सांप काटने और कुत्ता काटने का इलाज शहर में केवल सदर अस्पताल में ही होता है।

मोतिहारी के सुगौली बुढीगंडक नदी में जल स्तर में बृद्धि के कारण नगर पंचायत के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिसके बाद लोगों का पलायन शुरु हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही लोगों को अलर्ट कर दिया था। मूसलाधार बारिश के कारण नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या एक से 10 तक बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। जिससे स्थिति काफी बिगड़ गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 2.92 लाख लोग अभी बाढ़ की चपेट में है, जिसमें सबसे अधिक दरभंगा के 1 लाख 58 हजार तो किशनगंज के सबसे कम मात्र 290 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।सरकार ने प्रभावितों की सहायता के लिए 7 राहत शिविर खोले हैं, जिसमें सुपौल में दो दरभंगा में दो और गोपालगंज में तीन है। इन राहत शिविरों में 2306 लोग रह रहे हैं, जबकि प्रभावितों के लिए जिला प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोईघर का भी संचालन शुरू कर दिया गया है।