बड़ी खबर: भ्रामक समाचार छपवाने वालों पर अवमानना की कार्यवाही की तैयारी में एमकेपी काॅलेज

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देहरादून। प्रदेश के तीन समाचार पत्र हिन्दुस्तान, अमर उजाला व राश्टीय सहारा में एम0के0पी0 में 45 लाख के गबन पर कोर्ट ने मांगा जबाव षीर्शक के अन्तर्गत प्रकाषित समाचार को लेकर कालेज ने कानूनी कर्यवाही की तैयारी षुरू कर दी है। काॅलेज प्रबंध समिति का कहना है कि उक्त समाचार से महिला षिक्षण संस्थान को बदनाम करने की एक कोषिस की जा रही है। जिसके लिए प्रबंधन समिति कानून के रास्ते पर चलेगी।

यह बात शनिवार को एमकेपी काॅलेज प्रबंध समिति द्वारा बुलायी गयी प्रेसवार्ता में कही गयी। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि उक्त समाचार के माध्यम से संस्थान को बदनाम करने के लिए छपवाया जा रहा है। समिति ने कहा कि सोनिया बेनीवाल के द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका. सं0 191/2019 योजित की गयी है जबकि सोनिया बेनीवाल का एम0के0पी0 कालेज से प्रत्यक्ष कोई वास्ता नहीं है, वह केवल उन लोगों का मोहरा है जो पूर्व में प्रबन्ध समिति के पदाधिकारी थे और वे लोकतात्रिक तरीके से प्रबन्ध समिति में चुनाव जीतकर नहीं आ सके जिनके द्वारा कालेज में गलत नियुक्तियां की गयी है और वे अपने गुनाहों को छिपाने के लिए और लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए प्रबन्ध समिति के पदाधिकारियों के विरू़़़द्ध षासन प्रषासन में मनगढ़त षिकायते करते रहते हैं।

एमकेपी काॅलेज प्रबंध समिति के सचिव जितेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि जिस जनहित याचिका का हवाला देकर यह समाचार प्रकाषित करवाया गया है उस जनहित याचिका में दिनांक 2 जनवरी 2020 को सुनवाई के पष्चात 6 जनवरी 2020 को सुनवाई की तिथि नियत है, लेकिन समाचार पत्रों में इसके विपरीत भ्रामक समाचार छपवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे मा0 उच्च न्यायालय की भी अवमानना है यदि यह समाचार छपवाने वालों द्वारा 5 जनवरी 2020 तक इसका खण्डन नहीं किया जाता तो प्रबन्ध समिति इस भ्रामक समाचार को दिनांक 6 जनवरी को मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष रखकर भ्रामक समाचार प्रकाषित करवाने वालों पर अवमानना की कार्यवाही की प्रार्थना करेगी। जितेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि जनहित याचिका में जिस आडिट रिर्पोट का उल्लेख किया जा रहा है वह आडिट रिर्पोट प्रबन्धन द्वारा बर्खास्त प्राचार्या डा0 इन्दू सिंह ने तथ्यों को छिपाकर मनमाने तरीके से आडिट अपने कर्ताओं से तैयार करवायी है। जिसमें प्रबन्ध समिति का पक्ष कभी लिया ही नहीं गया है। उक्त आडिट रिपोर्ट के विरूद्ध प्रबन्ध समिति अपना पक्ष मा0 उच्च न्यायालय में रखेगी ओर जब तक मामला मा0 न्यायालय के विचाराधीन है तब तक याचिकाकर्ता व उनके आकाओं को धैर्य रखना चाहिए मा0 न्यायालय के समक्ष दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

क्या है एमकेपी काॅलेज अनुदान का मामला

एम0के0पी0 -पी0जी0 कालेज के लिए वर्ष 2012-13 में यू0जी0सी0 से रू0 50 लाख की अतिरिक्त ग्रान्ट स्वीकृत हुई थी जिसके विरूद्ध 90 प्रतिशत राशि रू0 45 लाख कालेज को प्राप्त हुए थे जिससे तात्कालीन कार्यवाहक प्राचार्या द्वारा प्रस्ताव के अनुरूप मदवार उपयोगी उपकरण क्र्रय-किये थे और उपकरण आर्पूतकर्ता फर्मो को एकाउन्टपेयी चैकों के द्वारा ही भुगतान किया गया था।

सारी प्रक्रिया कालेज स्तर पर प्राचार्या द्वारा की गयी थी और किये गये समस्त व्यय का तात्कालीन कार्यवाहक प्राचार्या द्वारा विधिवत आडिट भी करवाया गया था और उक्त अनुदान का उपभोग प्रमाणपत्र भी यू0जी0सी0 को भेजा गया लेकिन झूठी शिकायतों पर बिना किसी आधार के, बिना किन्ही कारणों के, द्वैश भावना से तात्कालीन सरकार ने कालेज के चुने हुए प्रबन्धतंत्र को भंग कर जिलाधिकारी देहरादून को कालेज का प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त कर दिया था।

प्राधिकृत नियंत्रक ने तुरन्त प्रबन्धन द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सिद्ध हाने पर बर्खास्त प्राचार्या डा0 इन्दू सिंह ;जिनकी बर्खास्तगी को कुलपति ने अनुमोदन नहीं दिया थाद्ध को प्राचार्या का कार्यभार ग्रहण करा दिया गया। वर्श 2014 में 45 लाख से क्र्रय किये गये उपकरणों का भौतिक निरीक्षण कर सूचीबद्ध तात्कालीन सीटी मजिस्टेट श्री गुणवन्त जी की उपस्थिति में किया गया था जिसकी रिपोर्ट कालेज में उपलब्ध है।

प्रबन्धन द्वारा बर्खास्त प्राचार्या डा0 इन्दू सिंह ;जिनकी बर्खास्तगी को कुलपति ने अनुमोदन नहीं दिया थाद्ध के द्वारा कालेज के लिए क्रय किये गये कुछ उपयोगी उपकरणों को एक कक्ष में बन्द कर कक्ष के दरवाजे को ईटों की चिनाई करवाकर बन्द करवा दिया गया और कुछ को उपयोग में लाया गया और कुछ को छिपा दिया गया।

शासन द्वारा पुनः वर्श 2017 में भौतिक सत्यापन्न हेतु नियुक्त टीम को पूरे उपकरण दिखाये ही नहीं गये उनसे मनमानी रिपोर्ट बनावायी गयी। तत्पष्चात डा0 इन्दू सिंह की सेवानिवृत्ति के पष्चात कार्यवाहक प्राचार्या डा0 सुनीता कुमार ने प्राचार्या का कार्यभार संभाला तो उन्हे प्राचार्या कक्ष की अलमारी के पीछे 45 लाख से क्रय किये गये कुछ उपकरण मिल गये जिसकी सूचना उन्होने प्राधिकृत नियंत्रक/जिलाधिकारी को दी।

जिलाधिकारी द्वारा अपने पत्र के माध्यम से उक्त सूचना भौंतिक सत्यापन्न हेतु गठित जांच कमेटी को तथा षासन को भी दी गयी जिससे स्पश्ट होता है 45 लाख के सारे नाटक के पीछे प्रबन्धन द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में प्राचार्या पद से बर्खास्त प्राचार्या डा0 इन्दू सिंह का है जिनके द्वारा वर्श 2013 में 45 लाख से क्रय किये गये उपयोगी उपकरण वर्श 2018 तक कालेज के उपयोग में नहीं लाये गये।

प्रबन्धन द्वारा उच्च न्यायालय के आदेष दिनांक 22.08.2019 के पष्चात कालेज का कार्यभार ग्रहण करने पर वर्तमान कार्यावाहक प्राचार्या डा0 रेखा खरे को कालेज के हित में 45 लाख से क्रय किये गये उपकरण उपयोग में लाने हेतु र्निदेश जारी किये जा चुके हैं और वे उपकरण आज भी उपयोगी है और आवष्यक उपकरण आज भी उपयोग में लाये जा रहे हैं।

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