‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें’ की गूंज के बीच विपक्ष का ‘ब्लैक डे’, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ संसद से सड़क तक प्रदर्शन
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में ‘ब्लैक डे’ मनाया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। संसद परिसर से लेकर जंतर-मंतर तक विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े और काली पट्टी पहनकर प्रदर्शन किया तथा आरोप लगाया कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ को बल प्रयोग से दबाने की कोशिश की गई।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। विपक्ष ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर संवाद करना चाहिए था, न कि पुलिस कार्रवाई का रास्ता अपनाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज
विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को परीक्षा प्रणाली में कथित विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था में बहाल नहीं हो पाएगा। यह मांग संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह जोर-शोर से उठी।
सरकार बोली- संसद में चर्चा के लिए तैयार
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार NEET और परीक्षा सुधारों पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार जवाबदेही के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।
संसद में भी गूंजा छात्र आंदोलन
छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद के दोनों सदनों में भी छाया रहा। विपक्ष ने कार्यवाही के दौरान लगातार इस विषय को उठाया, जिससे कई बार हंगामे की स्थिति बनी। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण शिक्षा और परीक्षा प्रणाली का मुद्दा मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक विषयों में शामिल हो गया।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
छात्र संगठनों और आंदोलन का समर्थन कर रहे समूहों ने कहा है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं सरकार का कहना है कि वह सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और सभी पक्षों से संवाद के लिए तैयार है।
