सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, कहा- पाकिस्तान दो शर्तें पूरी करे तभी होगी बहाली; पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र
नई दिल्ली। भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को पहले की तरह बहाल करने का प्रश्न तभी उठेगा, जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम उठाएगा तथा भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करेगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में संधि अपने वर्तमान स्वरूप में जारी नहीं रह सकती।
दो शर्तों पर टिकी संधि की बहाली
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने साफ संकेत दिया है कि संधि को लेकर आगे बढ़ने के लिए पाकिस्तान को दो प्रमुख शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली, सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और सत्यापन योग्य कार्रवाई। दूसरी, भारत की ओर से संधि में संशोधन और पुनर्विचार के प्रस्तावों पर रचनात्मक संवाद। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही जल साझेदारी पर आगे विचार किया जा सकता है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदला भारत का रुख
सरकार ने दोहराया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जारी रहने के कारण द्विपक्षीय विश्वास का आधार कमजोर हुआ है।
संधि के पुनर्गठन की वकालत
केंद्र सरकार का कहना है कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि वर्तमान परिस्थितियों, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जल आवश्यकताओं और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए व्यापक पुनर्गठन की मांग करती है। भारत का मानना है कि मौजूदा स्वरूप में संधि व्यावहारिक नहीं रह गई है और इसमें व्यापक संशोधन आवश्यक हैं।
पाकिस्तान ने जताई चिंता
भारत के रुख के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग उठा रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान ने विभिन्न देशों से इस मुद्दे पर सहयोग की अपील भी की है, जबकि भारत ने दोहराया है कि यह एक द्विपक्षीय विषय है और सुरक्षा चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
दोनों देशों के रिश्तों पर रहेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि पर भारत का नया रुख भारत-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब दोनों देशों के बीच जल सहयोग का भविष्य काफी हद तक आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और आपसी विश्वास बहाली पर निर्भर करेगा। फिलहाल भारत अपने रुख पर कायम है कि आतंक और बातचीत या आतंक और जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते।
