Monsoon Update: 10 हजार KM लंबी बादलों की श्रृंखला से बदलेगा मौसम, 20 जुलाई के बाद झमाझम बारिश की उम्मीद
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में कमजोर पड़े मानसून के बीच मौसम को लेकर नया संकेत सामने आया है। बंगाल की खाड़ी से मध्य प्रशांत महासागर तक करीब 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबा बादलों का क्षेत्र बना हुआ है। इस क्षेत्र में कई ट्रॉपिकल सिस्टम सक्रिय हैं, जो आने वाले दिनों में भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन सिस्टम में से कुछ पश्चिम की ओर बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंचते हैं तो जुलाई के आखिरी हिस्से में मानसून फिर मजबूत हो सकता है। इससे देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्या है 10 हजार किलोमीटर लंबी बादलों की श्रृंखला?
बंगाल की खाड़ी से मध्य प्रशांत महासागर तक फैले इस विशाल मौसमी क्षेत्र को इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन यानी ITCZ से जोड़ा जा रहा है।
ITCZ भूमध्य रेखा के आसपास बनने वाला वह क्षेत्र है, जहां उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध से आने वाली ट्रेड विंड्स आपस में मिलती हैं।
इस क्षेत्र में गर्म और नम हवा ऊपर उठती है, जिससे घने बादल बनते हैं और बारिश की गतिविधियां तेज होती हैं।
कई ट्रॉपिकल सिस्टम सक्रिय
रिपोर्ट के अनुसार, इस लंबे मौसमी क्षेत्र में कई कम दबाव वाले क्षेत्र और ट्रॉपिकल वेव्स सक्रिय हैं।
ये सिस्टम धीरे-धीरे पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। यदि इनमें से कोई मजबूत सिस्टम बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करता है तो वहां कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है।
इससे मानसून ट्रफ मजबूत होने और भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है।
20 से 30 जुलाई के बीच लौट सकती है बारिश
मौसम पूर्वानुमान मॉडल के अनुसार, 20 से 30 जुलाई के बीच इन ट्रॉपिकल सिस्टम का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप पर दिखाई दे सकता है।
यदि मौसमी परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो कमजोर पड़ा मानसून फिर सक्रिय हो सकता है।
इससे पूर्वी, मध्य और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
बिहार, झारखंड और पूर्वी UP को मिल सकती है राहत
मानसून की संभावित वापसी से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों को राहत मिलने की उम्मीद है।
इन क्षेत्रों में मानसूनी बारिश की कमी से कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
अच्छी बारिश होने पर खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और जलाशयों के जलस्तर में सुधार हो सकता है।
बंगाल की खाड़ी की भूमिका अहम
भारतीय मानसून के लिए बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौसमी सिस्टम विकसित होने पर नमी वाली हवाएं भारत के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचती हैं।
इससे पूर्वी भारत से लेकर मध्य और उत्तर भारत तक बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
ITCZ और भारतीय मानसून का क्या है संबंध?
भारतीय मानसून की सक्रियता पर ITCZ की स्थिति का प्रभाव पड़ता है।
मानसून के दौरान ITCZ उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है। इससे हिंद महासागर और अरब सागर से नमी वाली हवाएं भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आकर्षित होती हैं।
यदि ITCZ अनुकूल स्थिति में आता है तो मानसून ट्रफ सक्रिय होती है और देश में बारिश बढ़ती है।
भारी बारिश और बाढ़ का खतरा भी
ट्रॉपिकल सिस्टम के मजबूत होने से अच्छी बारिश की उम्मीद है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का खतरा भी बढ़ सकता है।
यदि कोई सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है तो निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी में समुद्री परिस्थितियां खराब होने पर मछुआरों के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण अगले दो सप्ताह
जुलाई का आखिरी हिस्सा खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण धान की रोपाई और दूसरी फसलों की बुआई प्रभावित हुई है, वहां मानसून की वापसी किसानों को राहत दे सकती है।
हालांकि, किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की सलाह के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने की जरूरत होगी।
अभी स्थिति पर नजर रखना जरूरी
7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबा ITCZ और इसमें सक्रिय ट्रॉपिकल सिस्टम मानसून की वापसी की उम्मीद बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, इन सिस्टम की वास्तविक दिशा, गति और तीव्रता आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।
यदि ये सिस्टम बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़कर मानसून ट्रफ को मजबूत करते हैं तो 20 से 30 जुलाई के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
फिलहाल मौसम विशेषज्ञ और पूर्वानुमान मॉडल इन मौसमी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। आने वाले कुछ दिन भारतीय मानसून की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगे।
