एल नीनो के खतरे पर केंद्र सतर्क, अमित शाह ने की उच्चस्तरीय बैठक, मंत्रालयों को तैयार रहने के निर्देश
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर मानसून की स्थिति, संभावित सूखे और कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया। बैठक में संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार सामान्य से कम वर्षा और एल नीनो की संभावित स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कृषि मंत्रालय को राज्यों के साथ समन्वय कर किसानों को मौजूदा मौसम के अनुरूप फसल चयन और कृषि संबंधी सलाह देने के निर्देश दिए। साथ ही जल संसाधन मंत्रालय को देश के सभी जलाशयों, बांधों और भूजल की स्थिति की नियमित निगरानी करने को कहा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जुलाई से सितंबर के बीच एल नीनो के तेजी से विकसित होने की संभावना जताई है। इसके चलते भारतीय उपमहाद्वीप सहित कई क्षेत्रों में हीटवेव, सूखे और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
कम पानी वाली फसलों पर जोर
अमित शाह ने बैठक में कहा कि जिन क्षेत्रों में वर्षा कम रहने की आशंका है, वहां कम पानी वाली फसलों जैसे मोटे अनाज (श्रीअन्न), दलहन और चारा फसलों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने बिजली मंत्रालय को भी कृषि कार्यों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
खाद्यान्न भंडार और कीमतों की समीक्षा
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि देश में चावल और गेहूं सहित आवश्यक खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। केंद्र सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
असम और अरुणाचल के लिए केंद्रीय टीम
अमित शाह ने हाल की भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित असम और अरुणाचल प्रदेश का आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) भेजने के भी निर्देश दिए। यह टीम प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, कृषि और जनजीवन को हुए नुकसान का आकलन करेगी।
जुलाई की बारिश पर विशेष नजर
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो इसका असर खरीफ फसलों, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी कारण केंद्र सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को समय रहते तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
