भारत-जापान शिखर सम्मेलन: आर्थिक सुरक्षा, AI और रक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस, नई रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती

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नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन भारत और जापान की “विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी” को अगले दशक के लिए नई दिशा देने का अवसर बनेगा। बैठक में पिछले वर्षों में हुए समझौतों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी का रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।

आर्थिक सुरक्षा और निवेश पर रहेगा विशेष जोर

शिखर सम्मेलन में दोनों देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने पर विचार करेंगे। ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, हरित प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। साथ ही निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच बड़ी संख्या में निवेश समझौतों और एमओयू पर भी सहमति बन सकती है।

AI और तकनीकी सहयोग को मिलेगी नई गति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार और डिजिटल तकनीक दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख आधार बनने जा रहे हैं। भारत और जापान AI अनुसंधान, डिजिटल अवसंरचना, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों के विकास में साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमत हो सकते हैं। दोनों देशों ने पहले भी AI क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी।

रक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर अहम चर्चा

भारत और जापान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा स्वतंत्र और मुक्त इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी अपने समन्वय को आगे बढ़ाएंगे। दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर देंगे। क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों देशों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऊर्जा और एलएनजी सहयोग पर भी बनेगी सहमति

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत और जापान ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच एलएनजी आपूर्ति और ऊर्जा भंडारण सहयोग से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा

जापान भारत का प्रमुख निवेशक और रणनीतिक साझेदार है। भारत में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां कार्यरत हैं, जबकि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना सहित कई बड़े अवसंरचना प्रोजेक्ट जापानी सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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