अल-नीनो का असर गहराया, बिहार से महाराष्ट्र तक लू का कहर, चेरापूंजी-मौसिनराम में भी कम हुई बारिश

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नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का गंभीर संकट देखने को मिल रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि मेघालय के विश्वप्रसिद्ध वर्षा क्षेत्र मौसिनराम और चेरापूंजी जैसे इलाकों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि मध्य भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के आगे बढ़ने की प्रक्रिया जून के मध्य में कमजोर पड़ गई, जिसके कारण मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है और लोगों को गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, मध्य भारत में वर्षा का घाटा 60 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। विदर्भ क्षेत्र में जून के दौरान सामान्य से 71 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि कई जिलों में लू की स्थिति बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की कमजोर प्रगति और वर्षा में कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। कई राज्यों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का कार्य शुरू किया जा सके।

मौसम विभाग ने पहले ही जून माह में सामान्य से कम वर्षा और कई क्षेत्रों में अधिक तापमान की संभावना जताई थी। विभाग के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में जून के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।

हालांकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और पूर्वी तथा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में इसकी प्रगति तेज होने की संभावना है। इससे गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ वर्षा की कमी भी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक से दो सप्ताह में मानसून सामान्य गति से आगे नहीं बढ़ा तो कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। देशभर में फिलहाल मानसून की गतिविधियों और वर्षा के आंकड़ों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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