मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी चिंता, देश के जलाशयों में घटा जल भंडारण
नई दिल्ली। देश में मानसून की धीमी प्रगति का असर अब जल संसाधनों पर भी दिखाई देने लगा है। जून के मध्य तक सामान्य से कम बारिश होने के कारण देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता घट गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी तो कृषि, पेयजल और बिजली उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है।
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के अनुसार, देश के कई बड़े बांधों और जलाशयों में जल स्तर सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। मानसून के शुरुआती चरण में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण जल भंडारण में कमी आई है, जिससे कई राज्यों की चिंता बढ़ गई है।
कई राज्यों में घटा जल स्तर
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है। इन जलाशयों का उपयोग सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून और जुलाई के शुरुआती सप्ताह मानसून के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं होती तो खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है असर
देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और खरीफ सीजन की फसलें मानसून पर आधारित होती हैं। कम वर्षा और जलाशयों में घटते जल स्तर के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान, मक्का, सोयाबीन और दालों जैसी फसलों की बुवाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
पेयजल और बिजली उत्पादन भी चुनौती
जलाशयों में कम पानी होने से कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा जलविद्युत परियोजनाओं के उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई राज्यों में पहले से ही जल संरक्षण और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की जा रही है।
मौसम विभाग ने जताई उम्मीद
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज होंगी और कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। यदि अगले दो से तीन सप्ताह में सामान्य वर्षा होती है तो जलाशयों के जल स्तर में सुधार संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे मानसून आधारित देश में वर्षा का वितरण और समय दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। फिलहाल सरकार और संबंधित एजेंसियां जल भंडारण की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
जल विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की आगामी प्रगति ही तय करेगी कि देश को जल संकट, कृषि उत्पादन और बिजली आपूर्ति के मोर्चे पर कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
