त्योहारी सीजन से पहले खुशखबरी, खाद्य तेलों की कीमतों में आ सकती है बड़ी गिरावट

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम की दिशा में बढ़ते कदमों का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के साथ खाद्य तेलों के दाम भी नरम पड़ने लगे हैं। इससे भारत में त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। इसके चलते कच्चे तेल और वनस्पति तेलों की कीमतों पर दबाव घटा है। भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में कमी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण खाद्य तेलों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसका असर भारत के बाजारों पर भी पड़ा और कई राज्यों में खाद्य तेलों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। व्यापारियों का कहना था कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और आयात लागत बढ़ने से कीमतें ऊपर चली गई थीं।

अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले हफ्तों में खुदरा बाजार में भी कीमतों में कमी दिखाई दे सकती है।

त्योहारी सीजन से पहले मिलेगी राहत

रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले खाद्य तेलों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में संभावित गिरावट का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं, होटल उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिल सकता है।

जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में कमी से परिवहन लागत भी घटेगी, जिससे खाद्य वस्तुओं की कुल लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि खुदरा बाजार में राहत मिलने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि कई कंपनियों और व्यापारियों के पास अभी पुराने ऊंचे दामों पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है।

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

खाद्य तेल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट से खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहती है तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को रसोई खर्च में राहत मिल सकती है।

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