क्रूड ऑयल सस्ता, क्या अब कम होंगे पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर के दाम?

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार सामान्य होने की संभावनाओं के बीच ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड के भाव युद्ध पूर्व स्तर के करीब पहुंच गए हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव करीब 75 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी घटकर करीब 78.66 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, जो पिछले महीनों के मुकाबले काफी कम है।

अप्रैल 2026 में भारतीय क्रूड बास्केट का औसत मूल्य 114 डॉलर प्रति बैरल से अधिक था। इसके बाद मई और जून में लगातार गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल के सस्ता होने से तेल विपणन कंपनियों की लागत कम होगी और उनके मार्जिन में सुधार आएगा।

क्या घटेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट का सीधा लाभ देश को मिलता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्यों का वैट और डीलर कमीशन भी शामिल होता है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकार की समीक्षा पर निर्भर करेगा।

LPG और CNG उपभोक्ताओं को भी मिल सकती है राहत

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर एलपीजी और सीएनजी की कीमतों पर भी पड़ सकता है। घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों के दाम तय करने में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो आगामी मूल्य समीक्षा में गैस उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

महंगाई पर पड़ेगा सकारात्मक असर

विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन सस्ता होने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे फल, सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की गिरती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत की खबर मानी जा रही हैं।

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