AI को सिखा रहे भारतीय कामगार, क्या खुद अपने रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं खतरा?
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इस तकनीकी क्रांति के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है जिसने रोजगार और भविष्य की नौकरियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारत में हजारों कामगार और गृहिणियां अपने दैनिक कामों को रिकॉर्ड करके AI आधारित रोबोट को प्रशिक्षित करने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही तकनीक भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकती है।
सिर पर कैमरा लगाकर रिकॉर्ड हो रहे रोजमर्रा के काम
रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय कामगार सिर पर कैमरा या स्मार्टफोन लगाकर खाना बनाना, कपड़े तह करना, सफाई करना, सामान व्यवस्थित करना और अन्य घरेलू या औद्योगिक कार्य रिकॉर्ड कर रहे हैं। इन वीडियो को AI कंपनियां “इगोसेंट्रिक डेटा” के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे रोबोट मानव व्यवहार और गतिविधियों को समझ सकें।
भारत बन रहा AI डेटा हब
AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियां भारत को डेटा संग्रह और एनोटेशन का बड़ा केंद्र मान रही हैं। कम लागत और बड़ी कार्यबल उपलब्ध होने के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कामगार इस प्रक्रिया में शामिल हैं। कुछ लोग घर से तो कुछ फैक्ट्रियों और विशेष स्टूडियो में काम कर रहे हैं, जहां उनके कार्यों को रिकॉर्ड कर मशीनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता
तकनीक के इस बढ़ते उपयोग ने रोजगार को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है। आलोचकों का तर्क है कि जिन कार्यों को आज लोग रिकॉर्ड कर रहे हैं, भविष्य में वही कार्य रोबोट और AI सिस्टम स्वतः करने लगेंगे। इससे घरेलू कार्यों, विनिर्माण इकाइयों और कई श्रम आधारित क्षेत्रों में मानव श्रमिकों की मांग कम हो सकती है।
हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि AI केवल नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए प्रकार के रोजगार भी पैदा करेगा। कुछ अध्ययनों के अनुसार AI कई क्षेत्रों में मानव श्रमिकों की जगह लेने के बजाय उनके कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने का काम करेगा।
तकनीकी प्रगति और सामाजिक चुनौती
AI आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट का वैश्विक बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि आने वाले दशकों में उद्योगों, गोदामों, अस्पतालों और घरेलू कार्यों में बड़ी संख्या में रोबोट तैनात किए जाएंगे। ऐसे में भारत में चल रहा यह डेटा संग्रह अभियान तकनीकी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI के विस्तार के साथ सरकारों और कंपनियों को कौशल विकास, पुनः प्रशिक्षण और रोजगार सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। अन्यथा तकनीकी प्रगति और रोजगार के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
