16 महीने बाद फिर आमने-सामने होंगे मोदी और ट्रंप, जानिए पिछली मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में क्या बदला

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नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 17 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर अहम द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। फरवरी 2025 में हुई पिछली मुलाकात के करीब 16 महीने बाद दोनों नेता आमने-सामने होंगे। ऐसे में भारत-अमेरिका संबंधों, वैश्विक भू-राजनीति और व्यापारिक मुद्दों पर इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फरवरी 2025 की मुलाकात से शुरू हुई थी नई साझेदारी

फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई मोदी-ट्रंप बैठक को दोनों देशों के संबंधों में नई शुरुआत के रूप में देखा गया था। इस दौरान “कॉम्पैक्ट” (COMPACT) पहल की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग, विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना था।

बैठक में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और रक्षा साझेदारी जैसे विषयों पर भी सहमति बनी थी। दोनों देशों ने तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी।

16 महीनों में सामने आईं नई चुनौतियां

हालांकि शुरुआती सकारात्मक माहौल के बावजूद पिछले महीनों में कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। इनमें व्यापारिक शुल्क, रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी आपत्तियां, वीजा संबंधी मुद्दे, पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां प्रमुख रही हैं।

अमेरिका द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए टैरिफ और व्यापारिक जांच ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को प्रभावित किया है। वहीं पाकिस्तान के साथ बढ़ते अमेरिकी संपर्कों को लेकर भी नई दिल्ली ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर बने रहे संवाद

राजनयिक चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संवाद जारी रहा है। दोनों नेताओं के बीच पिछले डेढ़ वर्ष में कई बार टेलीफोन पर बातचीत हुई है। हालांकि व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेदों ने संबंधों में नई जटिलताएं भी पैदा की हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंध सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर दोनों देश अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेते रहे हैं।

बैठक में उठ सकते हैं ये प्रमुख मुद्दे

जी-7 सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठक में भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौता सबसे प्रमुख मुद्दा रह सकता है। भारत अमेरिकी टैरिफ, व्यापार जांच और रूस से तेल आयात पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक कदमों पर स्पष्टता मांग सकता है।

इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़े समझौतों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे और पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी नीति को लेकर भी भारत अपनी चिंताओं को सामने रख सकता है।

वैश्विक नजरें इस बैठक पर

भारत-अमेरिका संबंध वर्तमान समय में वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा समीकरणों के केंद्र में हैं। ऐसे में जी-7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात न केवल दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय कर सकती है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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