रुद्रप्रयाग के लोली गांव में कमिश्नर का गर्मजोशी से स्वागत, बना उत्सव जैसा माहौल

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अपने पैतृक गांव लोली पहुंचे कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, ‘सौणा का मेहणा…’ गढ़वाली गाना गाया तो लोक संस्कृति में घुल गया माहौल

रुद्रप्रया: कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत अपने पैतृक गांव लोली पहुंचे. उनके पहुंचने पर पूरा गांव उत्सव में डूब गया. जहां ग्रामीणों ने अपने लाल का पारंपरिक और भावपूर्ण तरीके से स्वागत किया तो, वहीं उच्च पद पर आसीन बेटे को अपने बीच पाकर बुजुर्गों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला. इतना ही नहीं दीपक रावत ने गढ़वाली गीत भी गाया. जिस पर ग्रामीण झूम उठे.

‘सौणा का मेहणा…’ गाया तो झूमे लोग: बता दें कि कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का पैतृक गांव रुद्रप्रयाग के धनपुर पट्टी के लोली में है. इसी कड़ी में वे अपने पैतृक गांव पहुंचे. जहां उन्होंने गांव के बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया और उनके साथ आत्मीय संवाद किया. इस दौरान उन्होंने अपनी जड़ों से गहरे जुड़ाव का परिचय भी दिया. जहां वे ग्रामीणों के बीच बैठे और पहाड़ी गीत ‘सौणा का मेहणा…’ गाकर माहौल को पूरी तरह लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया.

उनके सहज और मिलनसार अंदाज ने हर किसी का दिल जीत लिया. ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत करते हुए क्षेत्र के विकास को लेकर अपनी अपेक्षाएं भी उनके सामने रखीं. कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के आने से पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहा. जहां हर कोई दीपक रावत की एक झलक पाने को उत्साहित नजर आया. भला हो भी क्यों न, क्योंकि, गांव से निकले दीपक रावत बड़े अफसर जो बने हैं.

पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र बिष्ट ने कहा कि दीपक रावत का अपने गांव से गहरा लगाव है. वे समय-समय पर यहां आते रहते हैं. उनके परिवार के सदस्य आज भी गांव में रहते हैं, जिससे उनका गांव से जुड़ाव और मजबूत बना हुआ है. वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत ने भी उनसे मुलाकात कर क्षेत्रीय समस्याओं से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि दीपक रावत का व्यवहार बेहद सरल और प्रेरणादायक है, जो सभी को प्रभावित करता है.

अपने पैतृक गांव लोली में दीपक रावत

साल 2007 के आईएएस अधिकारी हैं दीपक रावत: कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और संस्कृति से गहरे जुड़ाव का संदेश देने वाला रहा. जिसके तहत किसी ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही असली पहचान है. बता दें कि दीपक रावत साल 2007 के उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. जो अपने तेज तर्रार और कड़े अनुशासन के लिए जाने जाते हैं.

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