अनुप्रिया पटेल ने एम्स मंगलागिरी के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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रोगी-केंद्रित चिकित्सा, नैतिक मूल्यों और तकनीक-समर्थित स्वास्थ्य सेवा पर विशेष जोर

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री Anupriya Patel ने आंध्र प्रदेश स्थित AIIMS Mangalagiri के द्वितीय दीक्षांत समारोह में स्नातक स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को संबोधित करते हुए इसे उनके जीवन का एक निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक शिक्षा की पूर्णता का प्रतीक नहीं है, बल्कि चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में निरंतर सीखने, अनुसंधान और मानवता की सेवा की आजीवन यात्रा की शुरुआत है।

अपने संबोधन में उन्होंने चिकित्सा पेशे की प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक सतत विकसित होने वाला क्षेत्र है, जहाँ ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता का निरंतर अद्यतन आवश्यक है। उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर निर्णयों के केंद्र में सदैव रोगियों के हित को रखें और समाज के सबसे कमजोर एवं वंचित वर्गों की आवश्यकताओं के प्रति विशेष संवेदनशीलता बनाए रखें।

राज्य मंत्री ने चिकित्सकों की सामाजिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा और नैतिक प्रतिबद्धता का दायित्व है। उन्होंने कहा कि समाज चिकित्सकों पर अपार भरोसा करता है, और इस भरोसे का सम्मान सहानुभूति, नैतिक आचरण तथा उत्कृष्ट सेवा के माध्यम से किया जाना चाहिए।

भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में हो रहे संरचनात्मक और नीतिगत परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में देश सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में निरंतर वृद्धि, स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार तथा चिकित्सा शिक्षा में अभूतपूर्व वृद्धि को इस परिवर्तन की आधारशिला बताया।

उन्होंने आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना, अमृत फार्मेसी और राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को सुलभ बनाया है तथा नागरिकों पर होने वाले जेब से खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राज्य मंत्री ने आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक उपचार प्रणालियों के एकीकरण को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक विशिष्ट ताकत बताते हुए कहा कि यह समग्र दृष्टिकोण न केवल उपचार परिणामों को बेहतर बनाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और किफायती भी बनाता है। उन्होंने कहा कि एम्स संस्थानों में एकीकृत स्वास्थ्य सेवा एवं आयुष इकाइयों की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। रोग निगरानी, निदान, उपचार योजना और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में एआई-संचालित समाधानों के उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी चिकित्सकों को सशक्त बनाने का माध्यम है, न कि उनका प्रतिस्थापन।

कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मंत्री Nara Lokesh ने एम्स मंगलागिरी के विकास और उन्नत चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने स्नातकों से करुणा, नैतिक अखंडता और समर्पण के साथ चिकित्सा सेवा में योगदान देने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान एमबीबीएस, स्नातकोत्तर तथा पोस्ट-डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर संस्थान की उपलब्धियों और प्रगति से संबंधित रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें उन्नत चिकित्सा सेवाओं, रोगी देखभाल और अनुसंधान गतिविधियों का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं चिकित्सा अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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