प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी की शुरुआत
आपदा, सैन्य और राहत कार्यों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी यह सुविधा, नॉर्थईस्ट की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को मिला बड़ा बूस्ट
असम के डिब्रूगढ़ स्थित मोरान बाईपास पर नॉर्थईस्ट की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लैंड कर इतिहास रच दिया। यह सुविधा इस क्षेत्र में रणनीतिक, आपदा प्रबंधन और सैन्य तैयारियों के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी भारतीय वायु सेना के सहयोग से तैयार की गई है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपातकालीन स्थिति में यहां लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर आसानी से लैंड और टेकऑफ कर सकें। यह सुविधा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या अन्य संकट के समय राहत और बचाव कार्यों को तेज करने में मदद करेगी।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने एयर स्ट्रिप पर लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन भी देखा। अधिकारियों के अनुसार, यह एयर स्ट्रिप करीब 40 टन तक के फाइटर एयरक्राफ्ट और भारी ट्रांसपोर्ट विमानों को संभालने में सक्षम है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह सुविधा नॉर्थईस्ट की सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती सामरिक ताकत और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि जो सड़कें कभी सामान्य यातायात के लिए भी मुश्किल थीं, आज वही विमान संचालन के लिए तैयार हैं। यह बदलाव क्षेत्र के विकास और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है।
यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी न केवल रक्षा क्षेत्र के लिए बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगी। इससे नॉर्थईस्ट क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और देश की सामरिक तैयारियों को मजबूती मिलेगी |
