पीडीयूएनएएसएस की कार्यशाला में आईबीसी पर बढ़ी समझ
सीआईआरपी और ईपीएफओ से जुड़े कानूनी-प्रशासनिक मुद्दों पर आधे दिन का प्रशिक्षण
नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) पर आधे दिन की कार्यशाला आयोजित की। कार्यक्रम का उद्देश्य केन्द्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के सदस्यों, निवेश समिति के सदस्यों तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अधिकारियों की संस्थागत समझ को सुदृढ़ करना था।
कार्यशाला में केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति और ईपीएफओ की वित्तीय सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी सुश्री रोली शुक्ला माल्गे वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित और अतिरिक्त केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री एम.एम. अशरफ सहित सीबीटी, निवेश समिति, ईपीएफओ मुख्यालय और अकादमी के अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्री रमेश कृष्णमूर्ति ने आईबीसी के अंतर्गत दिवाला समाधान ढांचे की स्पष्ट समझ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिवाला मामलों में समयबद्ध और सुविचारित निर्णय ग्राहकों के हितों की सुरक्षा तथा विकसित हो रहे कानूनी ढांचे के अनुपालन के लिए आवश्यक हैं। श्री कुमार रोहित ने जटिल कानूनी एवं वित्तीय ढांचों से निपटने में नेतृत्व और निर्णयकर्ताओं को सशक्त बनाने में इस तरह के प्रशिक्षण की उपयोगिता को रेखांकित किया।
कार्यशाला के सत्रों में दिवाला समाधान ढांचे, कानूनी अंतिम निर्णय, समाधान के बाद वसूली, अपवादों और प्रशासनिक समापन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन चर्चाओं ने न्यासियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यावहारिक चुनौतियों एवं संवेदनशील मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श को बढ़ावा दिया।
यह पहल आईबीसी, 2016 के तहत उत्पन्न कानूनी और वित्तीय चुनौतियों से निपटने में ईपीएफओ की संस्थागत तैयारी और क्षमता निर्माण के प्रति पीडीयूएनएएसएस की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पीडीयूएनएएसएस के बारे में:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी, श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन ईपीएफओ का सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान है। 1990 में स्थापित यह अकादमी सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श सेवाएं प्रदान करती है।
