नौसेना व रक्षा विनिर्माण का भविष्य तय करेगा क्यूए-उद्योग सम्मेलन

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डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, तेज प्रमाणन और भरोसेमंद क्यूए इकोसिस्टम पर नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की चर्चा

नौसेना और रक्षा विनिर्माण में गुणवत्ता आश्वासन (क्यूए) की बदलती जरूरतों और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श के लिए 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण क्यूए सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना, गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों, शिपयार्ड, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) और प्रमुख उद्योग भागीदारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

सम्मेलन का विषय “ट्रेसेबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट – स्मार्टर क्वालिटी एश्योरेंस के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ” रखा गया है, जो रक्षा उत्पादन और जहाज निर्माण जैसे जटिल क्षेत्रों में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। आधुनिक रक्षा विनिर्माण में गुणवत्ता आश्वासन केवल निरीक्षण या परीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब डेटा-आधारित निर्णय, आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता और वास्तविक समय निगरानी जैसे आयामों से जुड़ चुका है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और तेज बनाना है। विशेष रूप से, विनिर्माण श्रृंखला में ट्रेसेबिलिटी बढ़ाने, अनुमोदन एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं में तेजी लाने, और उद्योग व सरकारी एजेंसियों के बीच दीर्घकालिक विश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत सूचना मॉडल जैसे समाधान भविष्य के क्यूए ढांचे की रीढ़ बनेंगे।

यह सम्मेलन नीति निर्माताओं, गुणवत्ता पेशेवरों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा, जहां वे सर्वोत्तम प्रथाओं, चुनौतियों और नवाचारों पर चर्चा कर सकेंगे। इससे रक्षा उत्पादन से जुड़े हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ने और प्रक्रियाओं के मानकीकरण को गति मिलने की उम्मीद है।

सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाले तकनीकी सत्र विशेष रूप से जहाज निर्माण और नौसेना प्रणालियों से जुड़े क्यूए पहलुओं पर केंद्रित होंगे। इनमें प्रमुख रूप से:

  • जहाज निर्माण के लिए डिजिटल गुणवत्ता आश्वासन – ट्रेसेबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट

  • गुणवत्ता आश्वासन नीति अनुपालन और उद्योग सहयोग

  • नौसेना जहाज निर्माण एवं स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति आदेशों में गुणवत्ता आश्वासन चुनौतियां

इन सत्रों में विशेषज्ञ वास्तविक समय ट्रैकिंग, डिजिटल दस्तावेजीकरण, प्रमाणन प्रक्रियाओं में स्वचालन, और आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। चर्चाओं में यह भी देखा जाएगा कि कैसे उद्योग और क्यूए एजेंसियां मिलकर एक सहयोगात्मक, दक्ष और विश्वसनीय गुणवत्ता आश्वासन ढांचा विकसित कर सकती हैं।

सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत भी होगी, जो रक्षा और नौसेना विनिर्माण इकोसिस्टम को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं। इनमें शामिल हैं:

1. भारतीय नौसेना एवं समुद्री उद्योग – क्षमता सूची (Compendium of Capabilities):
यह प्रकाशन उद्योग की क्षमताओं, विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करेगा, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ेगी और परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भागीदारों की पहचान आसान होगी।

2. कॉमन इंफॉर्मेशन मॉडल पर संयुक्त सेवा दिशानिर्देश:
युद्ध प्रणालियों और सेंसरों के एकीकृत डेटा प्रबंधन के लिए जारी किए जाने वाले ये दिशानिर्देश रक्षा प्रणालियों में सूचना के मानकीकरण, इंटरऑपरेबिलिटी और डेटा अखंडता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

3. ग्रीन चैनल दर्जा और स्व-प्रमाणन:
सिद्ध गुणवत्ता प्रदर्शन वाले पात्र उद्योग भागीदारों को ग्रीन चैनल दर्जा एवं स्व-प्रमाणन की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे प्रमाणन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी, प्रशासनिक बोझ घटेगा और उद्योग के लिए परिचालन दक्षता बढ़ेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के सम्मेलन न केवल नीतिगत सुधारों को गति देते हैं, बल्कि उद्योग और सरकारी संस्थानों के बीच विश्वास एवं सहयोग को भी मजबूत करते हैं। डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर आधारित गुणवत्ता आश्वासन ढांचा रक्षा विनिर्माण को अधिक प्रतिस्पर्धी, विश्वसनीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में सहायक होगा।

कुल मिलाकर, यह सम्मेलन नौसेना और रक्षा उत्पादन में गुणवत्ता आश्वासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जहां भविष्य की रणनीतियों, तकनीकी नवाचारों और सहयोगात्मक ढांचे की दिशा तय की जाएगी।

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