12 फरवरी को भारत बंद का बड़ा ऐलान
30 करोड़ से अधिक मजदूरों के शामिल होने का दावा, बैंक-परिवहन सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया गया है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने इस हड़ताल की घोषणा की है, जिसे कई किसान संगठनों, कृषि मजदूर यूनियनों, छात्र और युवा संगठनों का भी समर्थन मिला है।
यूनियनों का दावा है कि इस आम हड़ताल में लगभग 30 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने की संभावना है। उनका कहना है कि यह आंदोलन सरकार की कथित “मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों” के खिलाफ है।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
भारत बंद के कारण सार्वजनिक बैंकिंग सेवाएं, परिवहन व्यवस्था, डाक सेवाएं, बीमा क्षेत्र, कोयला खदानें, औद्योगिक इकाइयां और कुछ सरकारी विभाग प्रभावित हो सकते हैं। कई राज्यों में सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में कामकाज बाधित होने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, दूध सप्लाई, मेडिकल स्टोर, अस्पताल, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है। आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।
600 से अधिक जिलों में असर की संभावना
यूनियनों के अनुसार, देश के 600 से अधिक जिलों में हड़ताल का प्रभाव देखने को मिल सकता है। पिछले वर्ष हुई हड़ताल में लगभग 25 करोड़ श्रमिकों ने भाग लिया था, जबकि इस बार इससे अधिक भागीदारी का दावा किया जा रहा है।
किसान संगठनों का समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) सहित कई किसान संगठनों ने बंद को पूर्ण समर्थन दिया है। उनका कहना है कि कृषि और ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर भी यह आंदोलन महत्वपूर्ण है। कई राज्यों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए जाने की तैयारी है।
राज्यों में क्या स्थिति?
कुछ राज्यों में व्यापक बंद की संभावना जताई जा रही है, जबकि अन्य राज्यों में आंशिक असर पड़ सकता है। स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सरकार की ओर से अभी तक बंद को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
12 फरवरी को होने वाला यह भारत बंद देश की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं
