युवा-केंद्रित बजट से ‘विकसित भारत’ को मिलेगी नई गति: भूपेंद्र यादव

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केन्द्रीय बजट 2026-27 आर्थिक विकास और इकोलॉजिकल स्थिरता के बीच संतुलन का रोडमैप

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने केन्द्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए इसे युवाओं पर केन्द्रित, आर्थिक विकास और इकोलॉजिकल स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने वाला बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम है।

श्री यादव ने कहा कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत यह बजट तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण-अनुकूल विकास को सुनिश्चित करने के लिए ठोस आधार तैयार करता है। यह बजट गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, मध्यम वर्ग और उद्यमियों को समान रूप से सशक्त बनाने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिससे यह सही मायनों में ‘जन-केंद्रित बजट’ बन जाता है।

उन्होंने बताया कि बजट में वैश्विक जैव-विविधता संरक्षण से जुड़े कई अहम प्रावधान शामिल हैं, जिनमें इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस को सशक्त करना और भारत में पहले ग्लोबल बिग कैट समिट के आयोजन का प्रस्ताव प्रमुख है। यह पहल भारत की जैव-विविधता संरक्षण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रकृति-आधारित पर्यटन (नेचर-बेस्ड टूरिज्म) को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इसके तहत ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुओं के घोंसले बनाने वाले क्षेत्रों में ‘टर्टल ट्रेल्स’ तथा पुलिकट झील क्षेत्र में ‘बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स’ विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को आजीविका के नए अवसर भी मिलेंगे।

दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) के संदर्भ में श्री यादव ने बताया कि ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर-अर्थ कॉरिडोर विकसित करने की योजना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और रणनीतिक खनिजों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों के लिए जलवायु-अनुकूल बीजों के विकास हेतु छह वर्षीय मिशन की शुरुआत की गई है।

उन्होंने आगे बताया कि बजट में मत्स्य पालन क्षेत्र की वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए 500 जलाशयों के एकीकृत विकास का प्रावधान किया गया है। शहरी बुनियादी ढांचे को टिकाऊ बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ घोषित किया गया है, जो जलवायु-अनुकूल शहरी परियोजनाओं को गति देगा।

डी-कार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान कर कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीक को प्रोत्साहित करने की घोषणा की है। यह कदम पेरिस समझौते के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।

श्री यादव ने कहा कि नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन के विस्तार से ईवी बैटरी, सौर पीवी सेल, इलेक्ट्रोलाइज़र और पवन टर्बाइन के लिए घरेलू इकोसिस्टम विकसित होगा। साथ ही, अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों के संचालन से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम होगा।

उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि ‘प्रकृति’ और ‘प्रगति’ के संतुलन पर आधारित यह बजट भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करेगा, जहां विकास पर्यावरण और जैव-विविधता की रक्षा के साथ-साथ आगे बढ़ता है।

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