देहरादून में आसरा ने मनाया 5वां वार्षिक ‘ज्ञान मंथन मेला’, बच्चों की वैज्ञानिक प्रतिभा ने मोहा मन

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वंचित समुदायों के 200 से अधिक बच्चों ने 35 से ज्यादा नवाचारी परियोजनाओं के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया

देहरादून, 20 दिसंबर 2025 — आसरा ने 20 दिसंबर को सनातन धर्म इंटर कॉलेज, बन्नू, रेसकोर्स, देहरादून में अपना 5वां वार्षिक ज्ञान मंथन मेला भव्य रूप से आयोजित किया। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर आधारित शैक्षिक उत्सव आसरा के संस्थापक ट्रस्टी स्वर्गीय श्री अर्जन डेविड ब्रिजनाथ की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य बच्चों को उनकी वैज्ञानिक एवं गणितीय क्षमताओं को पहचानने और निखारने का मंच प्रदान करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में हुआ, जिनमें श्री कृष्णानंद बिजलवान, संयुक्त निदेशक, एससीईआरटी उत्तराखंड तथा श्रीमती मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी शामिल रहीं। विशेष अतिथि के रूप में श्री शरण ब्रिजनाथ और सुश्री गौरी खन्ना ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। आसरा के बोर्ड सदस्यों सुश्री शैला ब्रिजनाथ, श्रीमती नीलू खन्ना और सुश्री अदिति पी. कौर की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

ज्ञान मंथन मेला आसरा के शैक्षिक केंद्रों के विद्यार्थियों के लिए एक सृजनात्मक और प्रेरणादायक मंच है, जहाँ बच्चों ने कक्षा के भीतर और बाहर अर्जित ज्ञान के आधार पर वैज्ञानिक मॉडल, नवाचार और लाइव प्रयोग प्रस्तुत किए। यह आयोजन आसरा की टिंकरिंग लैब पहल का विस्तार है, जो बच्चों में वैज्ञानिक सोच, समस्या-समाधान कौशल और हाथों-हाथ सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देती है।

टिंकरिंग लैब का उद्देश्य बच्चों को प्रयोग, मॉडल निर्माण और नवाचार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है। इस वर्ष मेले में उत्तराखंड के तीन जिलों में स्थित आसरा के केंद्रों से 35 से अधिक नवाचारी परियोजनाएँ प्रस्तुत की गईं, जिनमें 200 से अधिक बच्चों ने सक्रिय सहभागिता की।

आसरा ट्रस्ट, वर्ष 2009 में स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो उत्तराखंड के वंचित समुदायों के बच्चों और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है। उत्तराखंड सरकार के शिक्षा विभाग के सहयोग से संचालित आसरा की पहलें शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, आश्रय और कौशल विकास पर केंद्रित हैं। पिछले 16 वर्षों में, आसरा ने उत्तराखंड के तीन जिलों में 80 से अधिक सतत परियोजनाओं के माध्यम से 28,600 से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

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