कांग्रेस की ‘रावत’ नीति- अनुभव और चुनौती का मिश्रण

0
579217292_1216367113647907_3240282248096685349_n

देहरादून। आगामी 2027 उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान द्वारा हाल ही में, अनुभवी नेता हरक सिंह रावत को पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष नियुक्त करना, राज्य की सियासत में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह कदम न केवल पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को साधने का प्रयास है, बल्कि भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए एक आक्रामक रणनीति का संकेत भी देता है।

हरक सिंह रावत का चार दशकों से अधिक का राजनीतिक करियर, जिसमें विभिन्न पार्टियों और सरकारों में मंत्री पद का अनुभव शामिल है, उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का एक मंझा हुआ खिलाड़ी बनाता है। वह राज्य के भौगोलिक और सामाजिक समीकरणों को बखूबी समझते हैं। चुनाव प्रबंधन की कमान उनके हाथों में सौंपकर, कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह अनुभव को सर्वाेपरि मानती है। गढ़वाल क्षेत्र में उनके प्रभाव और जनाधार से पार्टी को लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह नियुक्ति केवल हरक सिंह रावत तक सीमित नहीं है। गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष और प्रीतम सिंह को अभियान समिति का अध्यक्ष बनाकर, कांग्रेस ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने का प्रयास किया है। यह कदम स्पष्ट रूप से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) के एकाधिकार को चुनौती देता है, जिनके गुट के कई नेता 2022 के चुनाव में पार्टी की हार का कारण गुटबाजी को मानते थे। आलाकमान ने संदेश दिया है कि 2027 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

चुनौतियां और कानूनी अड़चनें

हालांकि, हरक सिंह रावत की राह आसान नहीं है। उनका राजनीतिक जीवन विवादों से भी भरा रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कथित अवैध पेड़ कटाई और निर्माण से जुड़े मामले में केंद्रीय एजेंसियां (ईडी और सीबीआई) उनकी जांच कर रही हैं। भाजपा इन मुद्दों को चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी, जिससे कांग्रेस की छवि पर असर पड़ सकता है। पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेगी।

कुल मिलाकर हरक सिंह रावत की नियुक्ति कांग्रेस के लिए एक जोखिम भरा, लेकिन रणनीतिक कदम है। यदि वह अपने अनुभव का उपयोग कर सभी धड़ों को एकजुट करने में सफल होते हैं और कानूनी चुनौतियों से पार्टी की छवि को बचा पाते हैं, तो 2027 में कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है। यह नियुक्ति दर्शाती है कि कांग्रेस बदलाव के मूड में है और जीत के लिए हर संभव दांव खेलने को तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *