गणेश गोदियाल को उत्तराखंड कांग्रेस की कमान, सामने ‘पहाड़ सी चुनौतियां, समंदर जैसी संभावनाएं
‘पहाड़ सी चुनौतियां, समंदर जैसी संभावनाएं
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आलाकमान ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक फेरबदल करते हुए गणेश गोदियाल को तत्काल प्रभाव से उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने करण माहरा का स्थान लिया है, जिन्हें अब कांग्रेस कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इस कदम को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी संगठन में नई ऊर्जा और स्थिरता लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
गणेश गोदियाल की यह दूसरी पारी है; इससे पहले वह जुलाई 2021 में भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। उनकी पुनः नियुक्ति यह दर्शाती है कि आलाकमान ने एक बार फिर एक अनुभवी और ज़मीनी नेता पर भरोसा जताया है, जो राज्य की राजनीतिक नब्ज को बेहतर ढंग से समझते हैं।
यह निर्णय राजनीतिक संतुलन साधने का भी प्रयास है, क्योंकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति का चेयरमैन नियुक्त कर विभिन्न गुटों को साधने की कोशिश की गई है। इससे पार्टी के भीतर की गुटबाजी को कम करने और एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया गया है, जो उत्तराखंड में कांग्रेस की एक बड़ी समस्या रही है।
चुनौतियां और अपेक्षाएं
गोदियाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में एक दशक से सत्ता से दूर कांग्रेस की खोई हुई ज़मीन वापस पाना है। भाजपा के मजबूत गढ़ बन चुके इस पहाड़ी राज्य में पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना आसान नहीं होगा। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए उनके नेतृत्व की क्षमता पर सबकी नज़रें टिकी होंगी।
हालांकि, गोदियाल की छवि एक जुझारू और ज़मीनी नेता की है, जिससे पार्टी को जमीनी स्तर पर खुद को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। नई नियुक्तियों, विशेष रूप से 27 नए जिलाध्यक्षों की घोषणा के साथ, पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने का एक खाका तैयार किया गया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत की नई टीम के साथ मिलकर कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत और एकजुट ताकत के रूप में खड़ा कर पाते हैं। यह बदलाव राज्य में पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेगा।
