नई दिल्ली — क्या आप जानते हैं कि महात्मा गांधी की तस्वीर रुपये पर कैसे और क्यों आई? इस सवाल का जवाब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया डॉक्यूमेंट्री ‘आरबीआई अनलॉक्ड: बियॉन्ड द रुपी’ में दिया गया है। डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, नोटों पर किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति की तस्वीर लगाने को लेकर एक समय रवीन्द्रनाथ टैगोर, मदर टेरेसा और अबुल कलाम आजाद जैसे कई दिग्गज नामों पर विचार किया गया था, लेकिन अंततः आम सहमति महात्मा गांधी के नाम पर बनी।
गांधी को क्यों चुना गया?
आरबीआई ने बताया कि प्रसिद्ध व्यक्ति की तस्वीर नोटों की पहचान को सरल बनाती है, विशेषकर नकली नोटों से बचाव के लिहाज से। गांधी जी की छवि देशवासियों के बीच व्यापक रूप से पहचानी जाती है, जिससे असली-नकली नोटों के बीच अंतर करना आसान हो जाता है। इसी वजह से नोट के डिज़ाइन और सुरक्षा विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए गांधी जी की तस्वीर को स्थायी रूप से नोटों पर शामिल किया गया।
रुपये के डिजाइन का इतिहास
डॉक्यूमेंट्री में यह भी बताया गया है कि आज़ादी से पहले के ब्रिटिश भारत में नोटों पर वन्य जीव-जंतु जैसे बाघ और हिरण, सजावटी हाथी और ब्रिटिश राजाओं की तस्वीरें छपा करती थीं, जो उस दौर की औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाती थीं। आजादी के बाद, नोटों पर अशोक स्तंभ, प्रसिद्ध स्थलों, वैज्ञानिक प्रगति और कृषि विकास से जुड़ी तस्वीरें छापी जाने लगीं।
महात्मा गांधी श्रृंखला की शुरुआत
आरबीआई की वेबसाइट के अनुसार, पहली बार 1969 में महात्मा गांधी की जन्मशती पर 100 रुपये का एक स्मारक नोट जारी किया गया था, जिसमें गांधी जी की तस्वीर सेवाग्राम आश्रम के साथ दिखाई गई थी। इसके बाद, 1987 में पहली बार नियमित मुद्रा में गांधी जी की तस्वीर वाले 500 रुपये के नोट जारी किए गए। बाद में 1996 में ‘महात्मा गांधी श्रृंखला’ की शुरुआत की गई, जिसमें उन्नत सुरक्षा फीचर्स के साथ नए नोट पेश किए गए।
रुपये की यात्रा और डिलीवरी प्रक्रिया
डॉक्यूमेंट्री ‘आरबीआई अनलॉक्ड: बियॉन्ड द रुपी’ के ज़रिये रिजर्व बैंक ने पहली बार अपने कामकाज को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें बताया गया है कि आरबीआई देश के विभिन्न हिस्सों तक नोटों को पहुंचाने के लिए रेल, जलमार्ग, और हवाई परिवहन जैसे बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करता है।
इस डॉक्यूमेंट्री ने न केवल रुपये की ऐतिहासिक यात्रा को दिखाया है, बल्कि यह भी बताया है कि कैसे भारतीय मुद्रा राष्ट्र की पहचान और प्रगति की कहानी बयां करती है।