विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अपील: “आज किसानों का दिन है, कृपया खेती पर चर्चा होने दें”

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नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष से भावनात्मक अपील की कि वे किसानों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में बाधा न डालें। प्रश्नकाल के दौरान चौहान ने कहा कि आज के दिन 20 में से 11 सवाल किसानों से संबंधित हैं और यह अवसर देश के अन्नदाताओं को समर्पित होना चाहिए।

लेकिन विपक्षी दलों द्वारा बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन और विशेष गहन समीक्षा (SIR) जैसे मुद्दों को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

लोकसभा में क्या बोले शिवराज सिंह चौहान?

अपने वक्तव्य में शिवराज सिंह चौहान ने कहा,
“आज किसानों का दिन है, गांव-गरीब का दिन है। 20 में से 11 सवाल किसानों के हैं। मेरी विपक्ष से प्रार्थना है कि किसानों और किसान कल्याण की चर्चा होने दें। हम जवाब देने को तैयार हैं। सदन के माध्यम से हम किसानों तक सरकार की योजनाएं भी पहुंचाना चाहते हैं।”

चौहान ने अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि प्रश्नकाल को सुचारू रूप से चलने दिया जाए ताकि खेती, किसान और गांव से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि कम से कम इस दिन किसानों के सवालों को उठने दें।

“विकास और जनकल्याण पर चर्चा रोकी जा रही है” — शिवराज का विपक्ष पर निशाना

सत्र के बाद शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर भी विपक्ष की तीखी आलोचना की। उन्होंने लिखा:

“आज संसद में कृषि, किसान और ग्रामीण विकास से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी थी। प्रश्नकाल में 11 सवाल किसानों और गांवों से जुड़े थे। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने अनावश्यक हंगामा कर लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में इन मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी। यह सिर्फ लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों किसानों का भी अनादर है।”

उन्होंने आगे कहा कि देश देख रहा है कि कौन किसानों के साथ खड़ा है और कौन सिर्फ सियासी शोर मचाने में लगा है।

विपक्ष के हंगामे से किसानों के सवालों पर पड़ा असर

कृषि मंत्री की यह अपील तब आई जब विपक्षी सांसदों ने बिहार में विशेष मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया और अन्य चुनाव संबंधी मामलों को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। इस कारण संसद में किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा अधर में लटक गई। इससे साफ है कि मानसून सत्र की शुरुआत ही टकराव और गतिरोध के माहौल में हो रही है।

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