विश्व पर्यावरण दिवस: हिमालयी स्वर्गारोहिणी सतोपंथ झील का जलस्तर घटा, पर्यावरणविद बेहद चिंतित
समुद्रतल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित स्वर्गारोहिणी सतोपंथ झील का जलस्तर घट गया है।इसे कम बर्फबारी कहें या ग्लोबल वार्मिंग का असर, मई माह में जहां कम से कम बीस ग्लेशियर पार कर सतोपंथ पहुंचा जाता था, वहीं इस बार सतोपंथ तक ट्रैकर और पर्यटक आसानी से पहुंच रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही लोकल वार्मिंग का भी असर पड़ रहा है।
बदरीनाथ धाम से करीब 23 किलोमीटर दूर स्वर्गारोहिणी सतोपंथ झील स्थित है। बदरीनाथ की यात्रा शुरू होने पर जून माह के मध्य तक ट्रैकर और पर्यटक सतोपंथ झील तक पहुंच जाते हैं। पिछले वर्षों में सतोपंथ झील तक पहुंचने के लिए रास्ते में जमीं बर्फ और करीब बीस ग्लेशियरों को कठिनाई से पार करना पड़ता था, लेकिन इस वर्ष मई माह में ही सतोपंथ तक ट्रैकर, पर्यटक और तीर्थयात्री आसानी से पहुंचने लगे हैं। पिछले तीन-चार वर्षों में चमोली जिले के अन्य स्थानों पर भी बर्फबारी कम हुई है।
अब यह असर उच्च हिमालयी क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। इस वर्ष सतोपंथ झील का जलस्तर भी बहुत कम हो गया है। पर्यावरणविद् इससे खासे चिंतित हैं।
भूमिगत जल और नदियों के जलस्तर में आई कमी
इस वर्ष उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी कम हुई है, जिससे भूमिगत जल और नदियों के जलस्तर में भी कमी आ गई है। सतोपंथ झील के जलस्तर में आई कमी को देखने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय की टीम मौके पर भेजी जाएगी। तभी इसका सही आकलन किया जा सकता है।
