प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मझधार में धामी सरकार, कैबिनेट विस्तार से धुल पाएगा मैदान विरोधी वाला दाग?

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देहरादून। भारी जनविरोध के बाद आखिरकार प्रेमचंद अग्रवाल ने रविवार शाम इस्तीफा दे दिया है। प्रेम चंद पर लगातार पहाड़ विरोधी के आरोप लग रहे थे। लेकिन उनके इस्तीफे के बाद अब प्रदेश सरकार पर मैदान विरोधी होने का टैग लगने लगा है। प्रेमचंद्र अग्रवाल के इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों में खासी नाराजगी है। उन्होंने इसके विरोध में बाजार बंद करने का ऐलान किया। हालांकि देहरादून में इसका कोई असर नहीं रहा लेकिन डोईवाला में वहां दुकानदारों ने बाजार बंद रखा। बता दें कि प्रेम चंद अग्रवाल डोईवाला के रहने वाले है, बनिया समाज से आते और मौजूदा समय में ऋषिकेश से विधायक है।

बजट सत्र के दौरान सदन में प्रेम चन्द्र अग्रवाल की टिप्पणी के बाद से स्पीकर ऋतु खंडूड़ी और प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट, भी लगातार पहाड़ी समाज के निशाने पर रहे। लेकिन भाजपा हाईकमान की ओर से अभी तक स्पीकर ऋतु भूषण और महेन्द्र भट्ट के खिलाफ कोई करवाई नहीं हुई है। शायद यही मैदानी मूल के समर्थकों की नाराजगी की बड़ी वजह मानी जा रही है।

मौजूदा समय में ऋतु भूषण खंडूड़ी विधान सभा अध्यक्ष है और महेंद्र भट्ट बीजेपी अध्यक्ष है। ये दोनों नेता पर्वतीय मूल से है। उत्तराखण्ड के इतिहास में ऋतु खंडूड़ी पहली विधान सभा अध्यक्ष है जिनको जनविरोध झेलना पड़ा है। कुल मिलाकर प्रेमचंद अग्रवाल के इस इस्तीफे के बाद ये लड़ाई पहाड़ और मैदान में बदल गया है।

प्रदेश में कैबिनेट फेरबदल की बातें चल रही हैं। बताया जा रहा है कि ऋतु भूषण मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। सीएम धामी दिल्ली रवाना हो गये हैं। अब बदलती राजनीतिक परिदृश्य में बीजेपी हाईकमान क्या कदम उठाती है, ये देखना दिलचस्प होगा। खासतौर पर तब, जब कम से कम प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे ने सेफ्टी वाल्व का काम नहीं किया। अलबत्ता मैदान विरोध का दाग जरूर लगा दिया।

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