सचिवालय तक पहुंचे यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले के तार, एसटीएफ ने अपर निजी सचिव को किया गिरफ्तार
देहरादून। यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में प्याज के छिलकों की तरह परत दर परत खुलती जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारी से शुरू हुआ एसटीएफ के जांच का सिलसिला सचिवालय तक पहुंचा गया है। इस मामले में कई रसूखदार और सफेदपोश लोगों के लिप्त होने की भी संभावना जताई जा रही है। उत्तराखण्ड एसटीएफ ने मामले में एक अपर निजी सचिव को हिरासत में लिया है।
शुक्रवार को एसटीएफ ने उत्तराखण्ड सचिवालय में तैनात अपर निजी सचिव को सूर्य प्रताप निवासी ग्राम निवाड़ मंडी जसपुर जिला उधम सिंह नगर को गिरफ्तार किया। न्याय विभाग को पुख्ता साक्ष्य मिलने पर मामले में संलिप्त होने पर न्यायालय में पेश किया गया। इस प्रकार पेपर लीक मामले में अब तक कुल 16 गिरफ्तारी हो चुकी है।
इससे पहले गुरूवार को उत्तराखण्ड के डीजीपी ने प्रेस वार्ता कर बताया कि अभी मामले में जांच जारी है। मामले में जो भी संदिग्ध है उसकी जांच की जा रही है और पुख्ता सुबूत मिलने पर ही गिरफ्तारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई संदिग्ध एसटीएफ की रडार में है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक मामले में एसटीएफ लखनऊ के प्रिंटिग प्रेस के डाटा एंट्री ऑपरेटर अभिषेक वर्मा को तीन दिन की रिमांड पर लेकर लखनऊ रवाना हुई थी। मामले में एसटीएफ अभिषेक से और अधिक जानकारी जुटाई।
24 जुलाई को यूकेएसएसएससी में पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले में जैसे जैसे कड़ी जुड़ती गई, वैसे ही गिरफ्तारियों का सिलसिला बढ़ता गया हैं अब तक एसटीएफ 16 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
मुख्य आरो आउट सोर्स कंपरी आरएमएस सॉल्यूशन के डाटा एंट्री ऑपरेटर अभिषेक वर्मा को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। वर्मा की जिम्मेदारी पेपर छपने के बाद सील करने की थी, लेकिन उसने तीनों पालियों के एक-एक सेट को टेलीग्राम एप से अपने साथियों को भेज दिया था। इस काम के उसे 36 लाख रूपये मिले थे। गिरफ्तार अभिषेक वर्मा की एसटीएफ ने न्यायिक रिमांड मांगी थी, जिसको स्वीकार करते हुए तीन दिन की न्यायिक रिमांड मिली थी।
