हिडन एजेंडा: मुख्यमंत्री के खिलाफ हरिद्वारी लाल के चेले ने छोड़ा लेटर बम, भाजपा से हुई छुट्टी
नई दिल्ली/देहरादून: पहाड़ पुत्र त्रिवेन्द्र सिंह रावत की लगातार बढ़ती लोकप्रियता से आजिज होकर विरोधियों ने हमले तेज कर दिये है। हरिद्वारी लाल, बनवारी लाल और भाग्गू भाई के किलों में हाहाकर मचा हुआ है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ उनकी हर चाल और पैंतरा फेल हो चला है। उनकी हर शकुनि चाल का वार खाली जा रहा है। हरिद्वारी लाल, बनवारी लाल और भाग्गू भाई की पिछली सारी चालें फेल हो चुकी है। मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी व्यक्तिगत छवि बिगाड़ने की कोशिशें भी नाकाम हो चली है। हरिद्वारी भाई, बनवारी लाल और भाग्गू भाई हर हाल में देहरादून में बसना चाहते हैं। इससे कम में वे मानने को तैयार नहीं है। लिहाजा त्रिवेन्द्र सरकार के गठन से लेकर आज तक हर दस-पंद्रह दिन में कोई नया प्रपंच रचते रहे हैं।

त्रिवेन्द्र रावत को जनता का वरदान है, मोदी-शाह का आशीर्वाद है। इस कारण उनका कोई भी विरोधी सीधे उनका मुकाबला नहीं कर सकता। लिहाजा गुरू द्रोण की नगरी देहरादून में इस तिकड़ी को बसना है तो उन्हें किसी शिखण्डी की जरूरत पड़ती है। इस बार हरिद्वारी लाल, बनवारी लाल और भाग्गू भाई ने लोकप्रिय मुख्यमंत्री पर हमला करने के लिए पूर्व विधायक लाखी राम जोशी का सहारा लिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ इस तिगड़ी के हमलों के इतिहास पर गौर करें तो जिस भी व्यक्ति या यूं कहें कठपुतली को ढाल बनाते हैं वे स्वार्थी, कुंण्ठित और जात विशेष के होते हैं। लेकिन प्रदेश भाजपा संगठन ने पहाड़ पुत्र त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ षडयंत्र रच रहे लाखी राम जोशी को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

इस बार इन्होंने पूर्व विधायक पूर्व विधायक लाखी राम जोशी को ढाल बनाया है। लाखी राम जोशी के इतिहास पर गौर करना जरूरी होगा। लाखी राम जोशी टिहरी के पूर्व विधायक रहे हैं। संगठन के ये कितने हितैषी हैं? यह इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में विधान परिषद् चुनाव में पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट देने का दाग इनके दामन पर हैं।
उस वक्त चर्चा रही थी कि माननीय विधायक ने क्रास वोटिंग के एवज में भारी रकम वसूली थी। जनता के वे कितने पक्षधर हैं टिहरी पुनर्वास आंदोलन के समय से लग जाता है। जब सरकारी स्कूलों के त्वरित अधिग्रहण को लेकर वे स्थानीय जनता के खिलाफ चले गये थे। एक महिला के नाम पर जिला पंचायत चुनाव में पैसों की बंदरबांट करने का आरोप भी उनके नाम पर है। अपनी निजी स्वार्थ और महत्वाकाक्षा से वशीभूत होकर इन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी का दामन भी थामा। वहां कुछ नहीं मिला तो भाजपा में वापिसी कर ली।

पार्टी और संगठन ने फिर भी गले लगाया और सिर माथे पर बिठाया। आज वह भाजपा में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उनके पुत्र को बीडीसी मेंम्बर बनाया। लेकिन कहते हैं कि चोर चोरी से जाय लेकिन हेराफेरी से ना जाए।
राजनैतिक हलकों में चर्चा है टिहरी गढ़वाल के प्रभारी रहते त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वहां जिताऊ उम्मीदवारों के टिकट देने की पैरवी की थी। जिस कारण से वह त्रिवेन्द्र रावत से नाराज चल रहे हैं। और बदला लेने के लिए दिशाहीन और अस्तित्व खो चुके नेताओं के चंगुल में फंस चुके हैं।
यहां पर उस पत्र के बिंदुओं की चर्चा करना भी जरूरी है जो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा है और जिसमें मुख्यमंत्री को हटाने की अपील की है। बकौल लाखी राम जोशी के पत्र के अनुसार त्रिवेन्द्र सिंह रावत के फैसलों से पार्टी को शर्मसार होना पड़ा है।
यहां लाखी राम जोशी को पूछा जाना चाहिए कि
क्या गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के फैसले से पार्टी शर्मसार हुई है?
25 हजार करोड़ से राजधानी को विकसित करने का फैसले से पार्टी शर्मसार हुई है?
कर्मचारियों को दिवाली का बोनस की घोषणा से?
प्रदेश में ग्रोथ सेंटर बनाने से?
सरकारी नौकरियों में विज्ञप्ति जारी करने के फैसले?
सौभाग्यवती योजना की घोषणा करने से?
प्रदेश में स्वारोजगार को एक मिशन बनाने से?
स्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू करने के निर्णय से?
प्रदेश के महाविद्यालयों को वाई-फाई सुविधा देने से?
प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने से?
प्रदेश में फल-फूल चुके ट्रांसफर उद्योग का खात्मा करने के फैसले से?
भ्रष्टाचार को खत्म करने और जीरो टालरेंस की नीति के फैसले?
दरअसल लाखी राम जोशी को हरिद्वारी लाल, बनवारी लाल और भाग्गू भाई के ’संयुक्त उपक्रम’ में नया रोजगार मिला है। लेकिन जैसा कि इतिहास रहा है वे इस काम को सही से अंजाम नहीं दे पाये। नये रोजगार के तौर पर अब वे इन्द्रप्रस्थ वाला ’झाड़ू’ भी उठा सकते हैं।
