कमलनाथ सरकार पर संशय बरकरार, सदन चालू न हो तो राज्यपाल को आदेश देने का अधिकारः सुप्रीम कोर्ट

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मध्य प्रदेश कमलनाथ सरकार के ऊपर संशय अब भी बरकरार है। फ्लोर टेस्ट करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अभी चल रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सदन चालू न हो और सरकार अल्पमत में आ गई हो, तो राज्यपाल को स्पीकर को विश्वास मत जीतने का आदेश देने का अधिकार है। हालांकि स्पीकर की तरफ से मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार बहुमत में है या नहीं, यह तय करने का अधिकार राज्यपाल के पास नहीं है। यह सिर्फ सदन तय कर सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के पास सिर्फ तीन अधिकार हैं- सदन की बैठक आहूत करने, सत्रावसान करने और सदन को भंग करने का।

स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में दखल की कोशिशः सिंघवी

सिंघवी ने कहा कि स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में दखल की कोशिश की जा रही है। बार-बार फ्लोर टेस्ट का मंत्र जपा जा रहा है। दलबदल कानून से बचने के लिए नया तरीका अपनाया गया है। 16 विधायकों के बाहर रहने से सरकार गिर जाएगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर लंबी बहस चली, लेकिन फैसला नहीं हो पाया था।

स्पीकर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रस्ताव नहीं माना

जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने सुझाव दिया कि स्पीकर एन.पी. प्रजापति को बागी कांग्रेस विधायकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करनी चाहिए। ये विधायक किसी के कब्जे में नहीं हैं, यह देखने के लिए कोर्ट ऑब्जर्वर भी नियुक्त कर सकता है। लेकिन स्पीकर ने कोर्ट का यह प्रस्ताव नहीं माना। सिंघवी ने कहा कि अगर कोर्ट ने स्पीकर को समयबद्ध निर्देश देना शुरू किया तो संवैधानिक संकट होगा। राज्यपाल लालजी टंडन के वकील ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ तो किनारे बैठे हैं, और स्पीकर इस राजनीतिक लड़ाई को कोर्ट में लड़ रहे हैं।

कमलनाथ ने भाजपा पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बेंगलुरू में मौजूद 16 विधायकों को लेकर कहा, ‘मैं सुबह से कर्नाटक के मुख्यमंत्री समेत देश के गृह मंत्री को फोन लगा रहा हूं लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि मेरे फोन का जवाब तक नहीं आया। हम तो आज भी चाहते हैं कि फ्लोर टेस्ट हो, लेकिन नियम प्रक्रिया व संविधान के अनुसार हो।’ मीडिया से चर्चा में नाथ ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा है कि अगर उसे लगता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है तो वह विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाए।

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