ब्रेकिंग न्यूज़ः फर्जी डिग्री मामले में फंसे एसजीआरआर डिग्री काॅलेज के प्राचार्य, मुकदमा दर्ज
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देहरादूनः एसजीआरआर डिग्री काॅलेज के प्राचार्य विनय आनंद बौडाई पर अपने शैक्षिक दस्तावेज को गलत तरह से दर्शाने को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। बौडाई पर आरोप हैं कि उन्होंने काॅलेज प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर अपने शैक्षिक अभिलेख को गलत तरीके से दर्शाकर प्राचार्य पद हासिल किया। एसजीआरआर डिग्री काॅलेज के प्राचार्य विनय आनंद बौडाई के खिलाफ पटेलनगर थाने में शिकायत दर्ज की गई है। जिसे आधार पर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
एसजीआरआर पीजी काॅलेज में प्राचार्य पद हासिल करने के लिए काॅलेज के वर्तमान प्राचार्य विनय आनंद बौडाई पर आरोप है कि उन्होंने प्राचार्य पद के लिए आवेदन के दौरान फर्जी तरीके से दस्तावेज का प्रस्तुतिकरण किया। जिसके आधार पर उन्होंने काॅलेज प्रबंधन के साथ मिलकर प्राचार्य पद हासिल करने का आरोप है। उन पर अरोप है कि प्राचार्य पद के लिए उन्होंने आवेदन के साथ जो बायोडाटा दिया उसमें उनके कई शैक्षिक दस्तावेज को दो दफा पेश किया। बौडाई द्वारा जो दस्तावेज आवेदन के समय दिये गये और काॅलेज प्रबंधन द्वारा तैयार किये गये सिनोप्सिस से उनके दस्तावेज मेल नहीं खाते हैं।
संदिग्ध है हाईस्कूल सार्टिफिकेट

बौडाई पर आरोप है कि उनका हाईस्कूल का अंकतालिका में कई झोल है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एसजीआरआर डिग्री काॅलेज की बेवसाइट से प्राप्त बायोडाटा में बौडाई ने हाईस्कूल की परीक्षा 1974 में राजस्थान विश्वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण बताया है। जबकि उनके द्वारा आवेदन के दौरान अपने रिज्यूम के साथ संलग्नक दस्तावेजों में हाई स्कूल की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान से 1972 में पूरक परीक्षा के रूप में उत्तीर्ण करना बताया है। दोनों दस्तावेज में बौडाई ने गलत जानकारी दी है। यही नहीं बायोडाटा के साथ जो अंक तालिका संलग्न की गई है उसमें 53.41 अंक दर्शाये गये हैं। जबकि यह अंक तालिका राजस्थान विश्वविद्यालय की प्री यूनिवर्सिटी (11वी) का है। जिसका रोल नम्बर 412 है जिसके अंक 53.41 है। जिसे काॅलेज प्रबंधन द्वारा हाईस्कूल में दर्शाया गया है।
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शैक्षिक दस्तावेज में गड़बड़ी
शिकायतकर्ता का आरोप है कि एसजीआरआर पीजी काॅलेज के प्राचार्य विनय आनंद बौडाई द्वारा 08 जून 2006 को आवेदित आवेदन में हाईस्कूल, इंटर और बी.एस के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं लिखा है। लेकिन काॅलेज द्वारा बनाये गये तुलनात्मक तालिका में बौडाई की बारहवी परीक्षा भी राजस्थान विवि से 59.67 प्रतिशत के साथ 1976 में उत्तीर्ण होना दर्ज किया है। जबकि न तो बायोडाटा में और न ही काॅलेज बेवसाइट से प्राप्त बायोडाटा इंटर पास होने की पुष्टि करता है। लेकिन काॅलेज द्वारा तैयार तालिका में इंटर में 59.67 अंक दर्शाये गये हैं। जो वास्तव में बीए प्रथम वर्ष के अंक हैं। इस बात से सिद्ध होता है कि बौडाई ने काॅलेज प्रबंधन के साथ कैसे मिलकर जालसाजी को अंजाम दिया। इंटर में बीए प्रथम के अंक दर्शाना घोर आपराधिक कृत्य है। इसी के आधार पर काॅलेज प्रबंधन ने अन्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर बौडाई को काॅलेज का सर्वोच्च पद पर नियुक्ति दे डाली। जबकि बौडाई के शैक्षिक दस्तावेज में भारी अनियमितता है। इतना ही नहीं बौडाई पीएचडी धारक भी नहीं है।
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गलत दस्तावेज पर ली नियुक्ति

शिकातयकर्ता का आरोप है कि बौडाई ने अपने बायोडाटा में विजीटिंग फैकल्टी के रूप में एफआरआई देहरादून में शिक्षण कार्य करना दिखाया है। जबकि निदेशक उच्च शिक्षा हल्द्वानी से प्राप्त की गई सूचना के अनुुसार वे या अन्य कोई भी कार्मिक नियमित सेवा में रहते अन्यन्त्र कार्य नहीं कर सकते हैं। जबकि बौडाई ने अन्यत्र सेवा की। इस प्रकार बौडाई ने इस गलत कार्य का भी अवैधानिक लाभ उठाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रदेश की उच्च शिक्षा में कई कई बौडाई हैं जिनके खिलाफ सरकार को संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिये। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस प्रकार माध्यमिक शिक्षा में फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एसआईटी जांच चल रही है उसी प्रकार उच्च शिक्षा में भी एसआईटी जांच कर फर्जी शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।
