बड़ी खबरःविजय बहुगुणा के करीबी बिधायक उमेश शर्मा काऊ होंगे बीजेपी से बाहर!

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देहरादून। बीजेपी के रायपुर विधायक उमेश शर्मा के लिए बीजेपी में बने रहना काफी मुश्किल हो गया है। पिछले कुछ समय से उमेश शर्मा काऊ की घेरा बंदशी बीजेपी और संघ से जुडे लोगों ने करनी शुरू कर दी थी। बीजेपी को लगता है कि विजय बहुगुणा के करीबी उमेश शर्मा को पार्टी से बाहर कर कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों को भी संदेश दिया जा सकता है।

रायपुर विधायक उमेश शर्मा बिजय बहुगुणा के काफी करीबी है। शर्मा को रायपुर से पहली बार बिजय बहुगुणा ने ही कांग्रेस का टिकट दिलवाया था। यही वजह थी कि कांग्रेस सरकार में बेहतर कार्य करवाने के बावजूद भी शर्मा को बिजय बहुगुणा के लिए पार्टी का दामन छोडना पडा था, लेकिन बीजेपी में आने के बाद से ही सबसे अधिक बीजेपी और संघ परिवार के निशाने पर कोई बागी विधायक रहा है तो वह उमेश शर्मा ही हैं,लेकिन बीजेपी के प्रदेश महामंत्री मुख्यालय राजेन्द्र भंडारी ने रायपुर विधायक उमेश शर्मा को कराण बताओं नोटिस जारी कर साफ कर दिया है कि अब शर्मा बीजेपी के लिए कोई मायने नहीं रखते है। जिस प्रकार से नोटिस को सार्वजनिक किया गया और विधायक को मात्र तीन दिन का समय अपनी बात कहने के लिए कहा गया है। साथ ही नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि अगर तीन दिनों के भीतर विधायक का जवाब नहीं मिलता है तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। जिससे साफ हो गया है कि अब बीजेपी विधायक उमेश शर्मा के लिए आगे की राह आसान नहीं है।

कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में जाने की खुशी मनाते विधायक

वहीं उमेश शर्मा काऊ इससे पहले नगर निगम चुनाव के दौरान भी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारकर भाजपा को हराने का काम कर चुके हैं। रायपुर से 2012 के चुनाव में त्रिवेंद्र सिंह रावत को हराने वाले उमेश शर्मा काऊ अब सीधे त्रिवेंद्र सिंह रावत के निशाने पर हैं। यह ताजा नोटिस से साफ हो गया है कि पार्टी अब उमेश शर्मा काऊ को बर्दाश्त नहीं करेगी। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही बीजेपी रायपुर सीट पर स्थिति साफ करना चाहती है। दरसल रायपुर सीट से खुद सीएम रावत भी 2022 के चुनाव में दावेदार हो सकते है। इसके साथ ही राज्य मंत्री डाॅ धनसिंह रावत ने भी रायपुर विस क्षेत्र से चुनाव लडने चक्कर में है।

गौरतलब है कि निकाय चुनाव में भी उमेश शर्मा काऊ की समर्थकों के आधा दर्जन से अधिक टिकट काटे गए थे उमेश शर्मा काऊ के यह सभी समर्थक निर्दलीय लड़े और जीत कर भी आ गए थे। तब भी पार्टी ने भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों को हराने का ठीकरा उमेश शर्मा काऊ पर ही फोड़ा था। पंचायत चुनाव बीजेपी उमेश शर्मा की समर्थकों को टिकट न देने के बाद यदि निर्दलीय प्रत्याशी फिर से जीत जाते हैं तो यह धारणा भी पुख्ता हो जाएगी कि भाजपा कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में आने वाले प्रत्याशियों को धीरे धीरे उनका जनाधार समाप्त करके खत्म करना चाहती है। उधर उमेश शर्मा के बीजेपी से बाहर होने पर कांग्रेस भी नजर बनाये हुये है खासकर हरीश रावत सर्मथकों ने साथ कर दिया है कि शर्मा की वापसी कांग्रेस में नहीं होंने देंगे।

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