बड़ी ख़बर: भू-वैज्ञानिकों का दावा, गंगोत्री हाइवे पर विकराल भूस्खलन की संभावना

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उत्तरकाशीः गंगोत्री हाईवे कभी भी बड़े भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। इसकी संभावना भू-वैज्ञानिकों की एक टीम जताई है। भू-विज्ञानियों का कहना है कि गंगोत्री से 35 किलोमीटर पहले सुक्की टाॅप कभी बड़े भूस्खलन की चपेट में आ सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने इसे रोकने के लिए ट्रीटमेंट की बात कही। लेकिन यह उपचार 700 मीटर नीचे भगीरथी के तट से होगा। क्षेत्र का निरीक्षण करने आये भू-वैज्ञानिक जल्द अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।

उत्तरकाशी जिले में सुक्की टाॅप के पास बीते कई वर्षों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। भागीरथी नदी के किनारे से शुरू हुआ यह भूस्खलन अब 700 मीटर ऊपर सुक्की टाॅप तक पहुंच चुका है। जो कि दिन प्रति दिन विकराल रूप धारण कर रहा है। इतना ही नहीं हाल ही में सुक्की टाॅप में बना व्यू प्वाइंट भी भूस्खलन के चलते खत्म हो चुका है। लगातार बढ़ते भूस्खलन से गंगोत्री हाइवे के साथ सुक्की टाॅप के बाजार का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।

वहीं जीएसआई (भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण), वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के वैज्ञानिक सुक्की टाॅप पहुंचे। जहां उन्होंने सुक्की टाॅप और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सुक्की टाॅप में इस भूस्खलन से छेड़छाड़ की गई तो यह विकराल रूप ले सकता है। इसका उपचार 700 मीटर नीचे भगीरथी नदी के तट से ही किया जाना चाहिए। इस मामले में भू-वैज्ञानिक एक सप्ताह के अंतराल में जिला प्रशासन उत्तरकाशी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

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