थोक महंगाई दर में आई कमी, मई महीने में रही 2.45 फीसदी

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मई महीने में लोगों को थोक महंगाई दर से थोड़ी राहत मिली है। मई में थोक महंगाई दर 2.45 फीसदी पर आ गई जबकि इससे पिछले महीने अप्रैल में यह 3.07 फीसदी पर थी।

अप्रैल में खाद्य पदार्थों के महंगे होने के बावजूद विनिर्माण वस्तुओं और ईंधन की कीमतों मे नरमी से थोक मुद्रास्फीति गिरकर 3.07 प्रतिशत पर आ गई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति मार्च, 2019 में 3.18 प्रतिशत थी जबकि अप्रैल , 2018 में यह 3.62 प्रतिशत पर थी।

दो दिन पहले खुदरा महंगाई दर के भी आंकड़ें आएं हैं। मई महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर सात महीने के उच्चतम स्तर 3.05 प्रतिशत पर पहुंच गयी। हालांकि यह अब भी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के दायरे में है जिससे रिजर्व बैंक के पास मांग में तेजी लाने और औद्योगिक उत्पादन को गति देने में मदद के लिए नीतिगत ब्याज दर में और कटौती करने की गुंजाइश बरकार है। औद्योगिक उत्पादन वृद्धि इस साल अप्रैल में 3.40 प्रतिशत रही। यह औद्योगिक वृद्धि का छह माह का उच्चतम स्तर है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को ये आंकड़े जारी किये थे। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी का मुख्य कारण सब्जियों, मांस तथा मछली की कीमतों का बढ़ना है। यह अप्रैल के 2.99 प्रतिशत की तुलना में अधिक है लेकिन मई 2018 के 4.87 प्रतिशत से कम है।

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