उत्तराखंड के 25 साल: बदलाव की दरकार, पर्यावरण और पलायन पर चिंता
देहरादून: उत्तराखंड के 25वें स्थापना दिवस पर “उत्तराखंड: एक विचार — देवभूमि के 25 वर्ष” विषय पर दून लाइब्रेरी में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं, समुदाय नेताओं और विशेषज्ञों ने राज्य के 25 वर्षों की यात्रा पर विचार करते हुए पर्यावरणीय क्षरण, पलायन और बेरोजगारी को प्रमुख चुनौतियां बताया।
कार्यक्रम में अधिवक्ता अभिजय नेगी ने कहा कि राज्य में बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएं यह संकेत हैं कि हमने विकास की सीमाएं तय नहीं कीं। दून डायलॉग के संयोजक अभिनव ठाकुर ने दून वैली अधिसूचना को रद्द किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि देहरादून की नाजुक पारिस्थितिकी पर इसका गंभीर असर पड़ा है।
वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि अब समय है कि सरकारें पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के संतुलन पर आधारित टिकाऊ विकास मॉडल अपनाएं।
राजनीतिक नेताओं में टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और धरमपुर विधायक विनोद चमौली ने पलायन रोकने के लिए कृषि, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि राज्य अब “प्रतीकात्मक उत्सवों” से आगे बढ़कर वास्तविक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए।
एक अन्य सत्र में लोक संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों जैसे एसिड अटैक, यौन उत्पीड़न और जोशीमठ आपदा पर भी चर्चा हुई। इस दौरान लोक कलाकारों और कार्यकर्ताओं जैसे पद्मश्री बसंती देवी और सौरभ मैठानी ने अपने विचार साझा किए।
