10% आरक्षण: गरीब मुस्लिम और ईसाई भी होंगे कोटे के हकदार-बैकफुट पर संघ

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मोदी सरकार के मास्टरस्टोक से राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ भी अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। एक मोदी सरकार के फैसले के समर्थन के बाद अब धीरे-धीरे संघ की समझ में आ गया है कि यह बिल आर्थिक पिछडेपन के आधार पर मुस्लिम समुदाय की ढाल बन सकता है, ऐसे में संघ की चिंता इस बात से भी बड गयी है कि भविष्य की राजनीति में उसकी स्थिति अब क्या होगी।

विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को लागू कराने की बात कही गई, जिसमें उसने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा तय की।] इस पर जवाब देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कैप लगाई थी, वह जातिगत आरक्षण को लेकर हटी।

केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित सामान्य वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के दायरे में देश के ईसाई और मुस्लिम गरीबों सहित सभी धर्मों के लोग आए।) इसकी जानकारी सामाजिक कल्याण मंत्री थावरचंद गहलोत ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पेश करते हुए दी। इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ 124 वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश करते हुए गेहलोत ने कहा कि इसके तहत सभी वर्ग के लोग आएंगे। उन्होंने कहा कि इस आरक्षण का आधार सामाजिक या शैक्षणिक नहीं है बल्कि आर्थिक है। 

इस विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को याद दिलाने की बात कही गई, जिसमें उसने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा तय की थी। इस पर जवाब देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कैप लगाई थी, वह जातिगत आरक्षण को लेकर केवल वही है । 

अरुण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कई बार निर्णय लिया था कि हम सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलने वाले आरक्षण पर ही यह सीमा तय कर रहे हैं। इसके पीछे अदालत का तर्क यह था कि आप अन्य वर्ग यानी अनारक्षित वर्ग हैं, उनके लिए सीट नहीं छोड़ोगे तो फिर पुराने भेदभाव को तो समाप्त किया जा सकेगा, लेकिन नए भेदभाव शुरू हो जाएंगे। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए अदालत ने कैप लगाई थी। 

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