‘डोसा किंग’ राजगोपाल की अस्पताल में मौत, कुछ हफ्ते पहले किया था आत्मसमर्पण

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सरवाना भवन के संस्थापक पी राजगोपाल की चेन्नई के एक अस्पताल में मौत हो गई है। उन्होंने कुछ हफ्तों पहले ही आत्मसमर्पण किया था। उनके ऊपर एक कर्मचारी को अगवा करके उसकी हत्या करने का आरोप था। जिसके लिए मद्रास उच्च न्यायालय ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उन्होंने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाने वाले दक्षिण भारतीय व्यंजनों की श्रृंखला सरवाना भवन के मालिक को समर्पण के लिए और समय देने से इनकार कर दिया था। राजगोपाल को 7 जुलाई तक समर्पण करना था। न्यायमूर्ति एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजगोपाल की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इस मामले में अपील पर सुनवाई के दौरान उसकी बीमारी का मुद्दा नहीं उठाया गया था।

राजगोपाल को 2001 में एक कर्मचारी की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी। राजगोपाल अपने एक कर्मचारी की हत्या करके उसकी पत्नी से शादी करना चाहता था। रिपोर्ट बताती है कि वह एक ज्योतिषी की सलाह पर उस महिला को अपनी तीसरी पत्नी बनाना चाहता था।

उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने इसी साल 29 मार्च को राजगोपाल सहित नौ दोषियों की अपील को खारिज करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 2009 में इस हत्याकांड में राजगोपाल और आठ अन्य की दस-दस साल की कैद की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

पी राजगोपाल ने 1981 में अपना पहला रेस्तरां ऐसे समय पर खोला जब बाहर खाना ज्यादातर भारतीयों के लिए असामान्य बात हुआ करती थी। इस श्रृंखला के रेस्तरां दुनिया भर में न्यूयॉर्क से लंदन तक के मौजूद हैं।

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