आईआईटी की मदद से हाईटेक होगी यूपी पुलिस
उत्तर प्रदेश पुलिस अब भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (आईआईटी) की मदद से और ज्यादा तकनीकी दक्षता हासिल करेगी। इससे सीसीटीएनएस, डीएनए फोरेंसिक्स, ड्रोन संचालन, 1090, यूपी-100 और सोशल मीडिया में ज्यादा हाईटेक होकर अपराधियों पर लगाम लगाने और आम आदमी तक न्याय पहुंचाने के लिये यूपी पुलिस काम कर सकेगी। इसी कड़ी में बुधवार को आईआईटी कानपुर और यूपी पुलिस के बीच डीजीपी मुख्यालय में अनुबंध पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।
अनुबंध पत्र पर आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. अभय करंदीकर और डीजीपी ओपी सिंह ने हस्ताक्षर किए। इसके बाद डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय में यूपी पुलिस ने तकनीक की दिशा में काफी काम किया है। इसका असर भी देखने को मिला है।
जरूरतों को समझ कर होगा विकास: आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. अभय ने कहा कि वीडियो सर्विलांस, डाटा एनालिसिस, ड्रोन टेक्नालॉजी में कई और आधुनिक पद्धति लाने के अलावा रियल लाइफ की जरूरतों को ध्यान में रखकर रिसर्च होंगे।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविन्द वर्मा ने कहा कि सीमित संसाधनों में इतनी अच्छी पुलिसिंग कहीं देखने को नहीं मिलती है। इस दौरान एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पीवी रामाशास्त्री, एडीजी एटीएस असीम अरुण, आशुतोष पाण्डेय, आईजी सुजीत पाण्डेय, प्रवीण कुमार मौजूद रहे।
‘यूपी कॉप’ एप देश का सबसे बढ़िया पुलिस एप
एफआईआर दर्ज कराने के लिये थाने के चक्कर लगाने की बजाये अब अब लोग ‘यूपी कॉप’ एप से बिना किसी झंझट के एफआईआर दर्ज करा ले ले रहे हैं। छह महीने में जहां दो लाख से अधिक लोगों ने यह एप मोबाइल पर डाउनलोड किया वहीं इसी अवधि में 1331 लोगों ने इस एप से एफआईआर दर्ज करायी। इसी उपलब्धि की वजह से यूपी कॉप एप को देश के सबसे बढ़िया सिटीजन सेंट्रिक पुलिस एप अवार्ड के लिए चुना गया है। यह अवार्ड 19 जुलाई को मुख्यमंत्री के हाथों यूपी पुलिस को दिया जाएगा। एडीजी टेक्निकल आशुतोष पाण्डेय ने बताया कि एप पर गम्भीर अपराध जैसे हत्या, डकैती, अपहरण और रेप के मुकदमे नहीं दर्ज किये जा सकते हैं। बाकी अपराध जिनमें लोगों को थाने के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, वह अब इस एप के माध्यम से तुरन्त एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
तकनीक से भ्रष्टाचार भी कम होगा
आईआईटी कानपुर के साथ एमओयू साइन करने के बाद डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि एप के माध्यम से एफआईआर दर्ज हो रही है। अब इस एमओयू से यूपी पुलिस में और सुधार होगा। इससे भ्रष्टाचार भी कम होगा। उन्होंने कहा कि जब थानों पर लोग कम जायेंगे और एप से ही उनके काम हो जायेंगे तो भ्रष्टाचार भी कम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्दी ही पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर एक-दो जिलों में पुलिसकर्मियों को सप्ताहिक अवकाश देने की दिशा में भी काम हो रहा है। पुलिस बल कम होने के कारण इसे लागू करने में देरी हो रही है।
